OBE: ओपन बुक परीक्षा कराने की तैयारी में है सीबीएसई, क्या है यह और छात्रों के लिए ये कितनी उपयोगी?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 23 Feb 2024 04:46 PM IST
सार
CBSE OBE: ओपन बुक परीक्षा में छात्र परीक्षा के दौरान अपने नोट्स, पुस्तकें या दूसरी अध्ययन सामग्री ले जाते हैं और उन्हें देखकर उत्तर देते हैं। इससे पहले सीबीएसई ने 2014-15 से 2016-17 तक कक्षा नौ और 11 की वार्षिक परीक्षाओं के लिए यह व्यवस्था लागू की थी।
सीबीएसई ओबीई
- फोटो : Amar Ujala
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई के नौवीं से 12वीं तक के छात्र भविष्य में किताब और नोट्स को रखकर परीक्षा दे सकते हैं। सीबीएसई इन छात्रों के लिए ओपन बुक परीक्षा (ओबीई) आयोजित कराने पर विचार कर रहा है। बोर्ड ने परीक्षा कराने के संबंध में ओपन बुक परीक्षा का प्रस्ताव तैयार किया है। जानकारी के अनुसार, बोर्ड इस योजना को नवंबर 2024 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करेगा।
आइये जानते हैं सीबीएसई ने परीक्षा के लिए क्या प्रस्तावित किया है? क्या है ओपन बुक परीक्षा? कैसे आयोजित की जाती है यह परीक्षा? अभी कहां लागू है यह व्यवस्था?
सीबीएसई ओबीई
- फोटो : Amar Ujala
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई के नौवीं से 12वीं तक के छात्र भविष्य में किताब और नोट्स को रखकर परीक्षा दे सकते हैं। सीबीएसई इन छात्रों के लिए ओपन बुक परीक्षा (ओबीई) आयोजित कराने पर विचार कर रहा है। बोर्ड ने परीक्षा कराने के संबंध में ओपन बुक परीक्षा का प्रस्ताव तैयार किया है। जानकारी के अनुसार, बोर्ड इस योजना को नवंबर 2024 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करेगा।
आइये जानते हैं सीबीएसई ने परीक्षा के लिए क्या प्रस्तावित किया है? क्या है ओपन बुक परीक्षा? कैसे आयोजित की जाती है यह परीक्षा? अभी कहां लागू है यह व्यवस्था?
CBSE (सीबीएसई)
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
सीबीएसई ने परीक्षा के लिए क्या प्रस्तावित किया है?
इस साल के अंत में कक्षा नौ से 12 तक के लिए ओपन बुक परीक्षा (ओबीई) कराई जाएगी। इसके लिए सीबीएसई पायलट कार्यक्रम की योजना बना रहा है। शुरुआती तौर पर यह व्यवस्था सिर्फ चयनित स्कूलों में ही की जाएगी। इसमें कक्षा नौ और 10 के लिए अंग्रेजी, गणित और विज्ञान विषयों को शामिल किया जा सकता है। वहीं, कक्षा 11 और 12 के लिए अंग्रेजी, गणित और जीव विज्ञान जैसे विषय योजना का हिस्सा हैं।
हालांकि, सीबएसई के अधिकारियों ने कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं में इसे लागू करने की योजना से इंकार किया है। बता दें कि 2023 में बोर्ड की आखिरी गवर्निंग बॉडी मीटिंग में ओबीई का प्रस्ताव रखा गया था।
आखिर क्या है ओपन बुक परीक्षा?
ओपन बुक परीक्षा में छात्रों को परीक्षा के दौरान अपने नोट्स, पाठ्यपुस्तकें या दूसरी अध्ययन सामग्री ले जाने और उन्हें देखने की अनुमति होती है। इस पायलट कार्यक्रम का उद्देश्य एक सटीक मूल्यांकन करना है। इन परीक्षाओं को पूरा करने और फीडबैक इकट्ठा करने में छात्रों को लगने वाले समय को बारीकी से समझा जाएगा।
कैसे कराई जाएगी ओबीई?
यह योजना राष्ट्रीय पाठ्यचर्या (एनसीएफ) की रुपपेखा में की गई सिफारिशों के अनुरूप है। ओपन बुक परीक्षा के पायलट कार्यक्रम पर बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसके जरिए हम मूल्यांकन करेंगे। इन परीक्षाओं को पूरा करने तक का समय, रचनात्मक और योगात्मक मूल्यांकन किया जाएगा। चयनित स्कूलों को एक पायलट कार्यक्रम से गुजरना पड़ेगा। ओपन बुक टेस्ट का डिजाइन, विकास और समीक्षा जून 2024 तक पूरा करने का प्रस्ताव है। स्कूलों में सामग्रियों के पायलट परीक्षण की योजना नवंबर-दिसंबर 2024 में बनाई जा रही है।
पहले कहां-कहां लागू की जा चुकी है ओबीई?
इससे पहले सीबीएसई 2014-15 से 2016-17 तक तीन वर्षों के लिए कक्षा नौ और 11 की वार्षिक परीक्षाओं के लिए एक ओपन टेक्स्ट आधारित मूल्यांकन (ओटीबीए) व्यवस्था लाया था। हालांकि, इस प्रारूप को लेकर नकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आईं जिसके कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीई व्यवस्था आम है। साल 2019 में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने इंजीनियरिंग कॉलेजों में ओपन बुक परीक्षा की अनुमति दी थी। कोरोना के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन ओबीई कराया था। इसके अलावा आईआईटी दिल्ली, आईआईटी इंदौर और आईआईटी बॉम्बे ने भी इस व्यवस्था को लागू किया था।
क्या उपयोगी है ओबीई व्यवस्था?
अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर मौजूद एक शोध में ओपन बुक परीक्षा प्रणाली के फायदे और नुकसान बताए गए हैं। शोध के मुख्य निष्कर्षों से पता चला कि कई छात्रों ने इस परीक्षा प्रणाली का समर्थन किया। ये छात्र दूरस्थ पाठ्यक्रमों (रिमोट कोर्स), नकल पर रोक और पाठ्यक्रम की गुणवत्ता में गिरावट के कारण व्यवस्था के पक्ष में थे।
वहीं, कुछ छात्रों ने ओपन बुक परीक्षा प्रणाली पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी। छात्रों ने तर्क दिया कि यह प्रणाली छात्रों में नकल की प्रवृत्ति पर लगाम नहीं लगा सकती। वहीं व्यवस्था सीखने की क्षमता में कमी ला सकती है।