कमेटी ने जांच में पाया कि ऐसे विषय जिसमें एक से दस छात्र रजिस्टर्ड हैं, लेकिन परीक्षा की तैयारी देशभर में होती है। कमेटी ने सुझाव दिया है कि दर्जनों ऐसे विषय जिनकी कोई डिमांड नहीं है, उन्हें हटा देना चाहिए। जबकि कुछ ऐसे विषय भी हैं, जोकि एक जैसे होते हैं, उन्हें मर्ज कर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा हिंदी, अंग्रेजी, साइंस, सोशल साइंस आदि मुख्य विषयों की परीक्षा मार्च से अप्रैल के बीच होनी चाहिए। जबकि जिन विषयों में छात्रों की संख्या कम है, उनकी परीक्षा स्कूल स्तर पर जनवरी से फरवरी के बीच होनी चाहिए, लेकिन फरवरी के आखिर से पहले खत्म की जाए। बोर्ड का काम प्रश्नपत्र तैयार करना, उसे स्कूल तक पहुंचाना व उत्तर पुस्तिका की जांच हो।