सीबीएसई पेपर लीक मामले पर 10वीं और 12वीं की दो परीक्षाएं दोबारा कराने के फैसले से छात्र नाखुश हैं। बीते तीन दिनों में इस मामले पर देशभर से प्रतिक्रिया आ रही हैं। वहीं विपक्ष की तरफ से इस मुद्दे पर सियासी विरोध शुरू कर दिया गया है। लेकिन छात्रों और बोर्ड के बीच ये तनाव आखिर पैदा कैसे हुआ? अगर बात की जाए कि इस पेपर लीक का खुलासा आखिर कैसे शुरू हुआ तो बता दें कि सीबीएसई के फैसले से एक रात पहले एक छात्र ने दिल्ली में अपना विरोध दर्ज किया।
27 मार्च की रात 10.40 बजे एक छात्र ने दिल्ली पुलिस को ये कहते हुए फोन किया कि उसके हाथ वो क्वेश्चन पेपर लगा है जो कल परीक्षा में आने वाला है। जाहिर है कि छात्र सीबीएसई के पेपर लीक होने का दावा कर रहा था। छात्र के नाबालिग होने के चलते हम उसका नाम और चेहरा आपसे छुपा रहे हैं। लेकिन इसी के साथ हम अपने पाठकों को सावधान करना चाहते हैं कि इस विवाद से इस युवक का कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि परीक्षा से पहले हाथ लगे सीबीएसई पेपर की जानकारी देकर उसने मामले को उजागर किया।
छात्र की बातों को पुलिस ने कितनी गंभीरता से लिया ये कहना तो मुश्किल है लेकिन छात्र का कहना है कि उसकी पूरी बात सुनी गई। इसके बाद पुलिस का दावा है कि वो मामले की जांच में जुट गई। अगले दिन यानी 28 मार्च को सीबीएसई ने अपना फैसला सुनाते हुए 10वीं के गणित और 12वीं के अर्थशास्त्र की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला सुना दिया। इसके बाद कई छात्रों द्वारा मामले में काफी कुछ कहा जा चुका है। लेकिन यही वो पहली ठोस शिकायत कही जा सकती है जो सीबीएसई पेपर लीक मामले में अहम है।