फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CBIC Promotion: UPSC की इस छूट के बाद भी प्रमोशन से दूर हैं कर सहायक, देरी हुई तो 1800 कार्मिक झेलेंगे नुकसान

सार

CBIC Promotion: डीओपीटी का नियम है कि जब किसी पद पर कोई सीनियर कार्मिक, तय सेवाकाल के हिसाब से पदोन्नति के लिए योग्य नहीं है, लेकिन उसका जूनियर पदोन्नति के सभी नियम, यानी निर्धारित सेवाकाल पूरे करता है, तो ऐसे में वरिष्ठ को पदोन्नति देने के लिए कुछ नियमों में छूट मिलती है...
विज्ञापन
CBIC Promotion - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क, बोर्ड (सीबीआईसी) के 'कर सहायक' पदोन्नति की राह पर पिछड़ते जा रहे हैं। मौजूदा परिस्थितियों में इन कार्मिकों को दस साल में भी पहली पदोन्नति मिलने की संभावना नजर नहीं आ रही थी। पदोन्नति की मांग को लेकर 'ऑल इंडिया सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स मिनिस्ट्रियल ऑफिसर एसोसिएशन' लंबे समय से आवाज उठा रही है। नतीजा, सीबीआईसी ने 'कर सहायकों' को पदोन्नति देने की योजना बनाई, मगर उसमें भी टालमटोल कर दिया। गत वर्ष विभाग ने पदोन्नति मामले में एकबारगी छूट देने के लिए यूपीएससी को फाइल भेजी थी। एसोसिएशन के मुताबिक, वहां से हरी झंडी मिल गई, लेकिन विभाग अब जानबूझकर देरी कर रहा है। सीनियर-जूनियर क्लॉज को लेकर स्पष्ट नियम हैं, लेकिन विभाग उन्हें लागू करने में झिझक रहा है। नियमों को एग्जामिन कर रहे हैं, यह कहकर पदोन्नति देने में देरी की जा रही है। इस देरी का खामियाजा 'कर सहायकों' को उठाना पड़ेगा। उन्हें न केवल वित्तीय नुकसान होगा, बल्कि भविष्य में मिलने वाली पदोन्नति में भी देरी हो जाएगी।

मनमर्जी से तय किए 'भर्ती नियम', दिया झटका

सीबीआईसी के समकक्ष, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) में टैक्स असिटेंट को तीन वर्ष में पहली पदोन्नति मिल रही है। उन्हें अपने सेवाकाल में पदोन्नति के पांच अवसर मिल जाते हैं। खास बात है कि दोनों विभागों की भर्ती प्रक्रिया एवं योग्यता समान है। 'सीबीआईसी' ने अपनी मनमर्जी से 'भर्ती नियम' तय कर, टैक्स असिस्टेंट को पदोन्नति के मोर्चे पर बड़ा झटका दे दिया। 'कर सहायक' को पहली पदोन्नति 'एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट' के पद पर मिलती है। अब नए भर्ती नियमों में 'एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट' के पद पर सीधी भर्ती करने की बात कह दी गई। एसोसिएशन के मुताबिक, सीबीआईसी में कर्मियों के साथ अन्याय हो रहा है। पहले जो प्रमोशन दो-तीन वर्ष में मिलता था, अब वह दस वर्ष में मिलेगा। अगर सभी खाली पदों को सीधी भर्ती से भरा जाता है, तो 'कर सहायक' की पहली पदोन्नति में देरी और दूसरी पदोन्नति (इंस्पेक्टर) भी खत्म हो जाएगी। एसोसिएशन का कहना था है कि विभाग ने अपनी मनमर्जी से भर्ती नियमों में संशोधन कर दिया है। सीधी भर्ती से 40 फीसदी पद और पदोन्नति के कोटे से 60 फीसदी पद भरे जाते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पदोन्नति से भरे जा वाले पदों का प्रतिशत सौ कर दिया जाए।

जब यह नियम मौजूद है तो पदोन्नति में देरी क्यों

डीओपीटी का नियम है कि जब किसी पद पर कोई सीनियर कार्मिक, तय सेवाकाल के हिसाब से पदोन्नति के लिए योग्य नहीं है, लेकिन उसका जूनियर पदोन्नति के सभी नियम, यानी निर्धारित सेवाकाल पूरे करता है, तो ऐसे में वरिष्ठ को पदोन्नति देने के लिए कुछ नियमों में छूट मिलती है। उसमें यह देखा जाता है कि वरिष्ठ कार्मिक ने उस पद पर दो साल पूरे कर लिए हों या पदोन्नति के लिए जितने सेवाकाल की जरूरत है, उसका आधा सेवाकाल पूरा कर लिया हो। यह शर्त पूरी होती है तो उसे भी पदोन्नति मिल जाएगी। इस मामले में 'वन टाइम रिलेक्सेशन' लेने के लिए सीबीआईसी बोर्ड द्वारा यूपीएससी को फाइल भेजी गई थी। वहां से मंजूरी मिल गई है। कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी को अब यह अधिकार मिल गया है कि अब किसी कार्मिक ने दस की बजाए, अगर छह साल का सेवाकाल पूरा कर लिया है, तो उसे पदोन्नति दी जा सकती है। अब विभाग, सीनियर जूनियर क्लॉज को लागू करने में देरी कर रहा है। कहा जा रहा है कि अभी इस नियम का अध्ययन हो रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि यूपीएससी का नियम है, जब कहीं पर एकबारगी छूट देनी है तो वहां सीनियर-जूनियर क्लॉज को लागू करने में कोई दिक्कत नहीं है। अथॉरिटी, जानबूझकर पदोन्नति देने में देरी कर रही है। पदोन्नति में देरी का नुकसान 1800 कार्मिकों को भुगतना पड़ सकता है। उन्हें पहली पदोन्नति एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट के पद पर मिलनी है। अगर यहां देरी हुई तो उन्हें वित्तीय नुकसान तो होगा ही, साथ ही उनके लिए अगली पदोन्नति का इंतजार और ज्यादा लंबा हो जाएगा।

तो फिर मिशन मोड में कैसे मिलेगा रोजगार

विभाग की इस देरी से अब केवल दो सौ कर सहायकों को ही पदोन्नति मिलेगी, जबकि पदोन्नति की सूची में लगभग दो हजार कार्मिक शामिल हैं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है, एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी मिशन मोड में रोजगार देने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर सीबीआईसी, पदोन्नति में देरी कर रहा है। अगर कर सहायकों को पदोन्नति नहीं मिलेगी तो नए पद सृजित नहीं होंगे। जब नए पद नहीं होंगे तो युवाओं को रोजगार भी नहीं मिल सकेगा। इससे पहले विभाग ने प्रोटेक्शन क्लॉज की बात भी नहीं मानी थी। 2015 में प्रिसिंपल आरआर आए थे। विभाग ने उन्हीं में संशोधन कर दिया। नए बदलावों में सीधी भर्ती, जिसका प्रतिशत 40 फीसदी है, वह फॉर्मूला तकनीकी तौर पर पूरा नहीं हो सका। एसोसिएशन ने मांग की थी कि सीधी भर्ती के प्रतिशत को पदोन्नति के दायरे में शामिल कर दिया जाए। जब भर्ती नियम बदले जाते हैं तो संबंधित पक्ष से राय ली जाती है। एसोसिएशन की ओर से सीबीआईसी को सुझाव दिए गए, लेकिन उन्हें माना नहीं गया। संशोधन में बहुत सी बातें ऐसी रही, जो ड्रॉफ्ट का हिस्सा नहीं थी।

पदोन्नति में ही लगेगा एक दशक

सीबीआईसी में टैक्स असिस्टेंट को पहले तीन साल में प्रमोशन मिलता था, अब 10 साल लग रहे हैं। मौजूदा नियमों के अंतर्गत टैक्स असिस्टेंट को अगर इंस्पेक्टर के पद पर पहुंचना है, तो उसे दो तीन दशक का इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में मुश्किल से दो या तीन प्रमोशन ही मिल सकेंगे। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) में टैक्स असिटेंट को तीन वर्ष में पहला प्रमोशन मिल रहा है। उन्हें अपने सेवाकाल में पदोन्नति के पांच अवसर मिल रहे हैं, जबकि दोनों विभागों की भर्ती प्रक्रिया एवं योग्यता समान है।

आठ वर्ष पहले शुरू हुई थी पदोन्नति की दिक्कत

2015 में सीबीआईसी ने सीनियर टैक्स असिस्टेंट का पद नाम बदलकर उसे 'एक्जीक्यूटिव असिस्टेंट' कर दिया था। इस पद तक पहुंचने के लिए कर्मचारी को 10 साल का कार्यकाल पूरा करना होगा। दूसरी तरफ, सीबीडीटी' में टैक्स असिस्टेंट को 3 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद ही सीनियर टैक्स असिस्टेंट का प्रमोशन मिल जाता है। इतना ही नहीं, सीबीडीटी में सीनियर टैक्स असिस्टेंट दो साल बाद इंस्पेक्टर बन जाते हैं। सीबीआईसी में कार्यरत टैक्स असिटेंट को 10 साल में केवल एक प्रमोशन मिल रहा है। दोनों विभागों में टैक्स असिटेंट की भर्ती प्रक्रिया से लेकर उनके काम करने का तरीका एक जैसा है, तो फिर पदोन्नति को लेकर यह भेदभाव क्यों। 2015 से पहले दोनों ही विभागों में प्रमोशन के नियम एक जैसे थे, लेकिन सीबीआईसी ने प्रमोशन के नियम में बदलाव कर कार्मिकों के बीच भेदभाव पैदा कर दिया है। सीबीआईसी ने 2016 में फिर से बिना स्टेकहोल्डर्स के कमेंट के लिए इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन के लिए कार्यकाल की अवधि को बढ़ाकर दो साल से पांच साल कर दिया। यानी सीबीआईसी में काम कर रहे एक टैक्स असिस्टेंट को 15 साल में दो प्रमोशन मिल रहे हैं। सीबीडीटी में काम कर रहे टैक्स असिस्टेंट को पांच साल में दो प्रमोशन दिए जाते हैं। जब सीबीआईसी के लिए नए नियम बनाए जा रहे थे तो उनमें 'प्रोटेक्शन क्लॉज' का प्रावधान भी नहीं किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें