पीएनबी घोटाले की जांच कर रही सीबीआई को यह सवाल परेशान कर रहा है कि बैंक ने वित्तीय अनियमितता की पूरी जानकारी एक बार में न देकर किस्तों में क्यों दी। एजेंसी के अनुसार मामले में इस एंगल से भी जांच की जा रही है।
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार बैंक को 16 जनवरी, 2018 को
नीरव मोदी की कंपनियों पर शक हुआ था। उस दिन नीरव की तीन कंपनियां-डायमंड आर अस,सोलर एक्सपोर्ट्स और स्टेलर डायमंड्स-आयात दस्तावेज के साथ लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग जारी कराने पहुंची थी ताकि विदेशी सप्लायरों को भुगतान किया जा सके। बहरहाल, मामले को देख रहे बैंक अधिकारी को इस संबंध में बैंक के सिस्टम में कोई पुरानी एंट्री नहीं मिली।
इसका पता चलने के बाद 29 जनवरी को बैंक ने सीबीआई में घोटाले की शिकायत दर्ज करवाई। इसके आधार पर एजेंसी ने 31 जनवरी को एफआईआर दर्ज की और मुंबई और सूरत में 20 ठिकानों पर छापे मारे। नीरव और तीन भगोड़े आरोपियों के खिलाफ 4 फरवरी को लुक आउट सर्कुलर जारी किया।
छापे की कार्रवाई में नीरव के आवास समेत आरोपियों के अन्य ठिकानों से सीबीआई को आयात बिलों से संबंधित 95 अहम दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं। जब्त कंप्यूटरों की मिरर इमेंजिंग का काम पूरा हो चुका है।
सीबीआई इस मामले की जांच कर ही रही थी कि पीएनबी ने एक पखवाड़े बाद दो और शिकायतें दर्ज करवाईं, जिसके अनुसार बैंक में घोटाले की रकम बढ़कर 114 अरब रुपये पहुंच चुकी थी। सीबीआई को इस बात की हैरानी है कि बैंक ने एक बार में शिकायत क्यों नहीं की। बहरहाल, जांच एजेंसी ताजा शिकायतों का विश्लेषण करने के बाद यह तय करेगी कि नई एफआईआर दर्ज की जाए या पहले से दर्ज एफआईआर का दायरा बढ़ाया जाए।