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सीबीआई बनाम सीबीआई : जानिए क्या है मामला और कौन हैं मुख्य पात्र

Thu, 25 Oct 2018 05:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना दोनों दो ध्रुवों पर खड़े हैं। लेकिन दोनों के बीच एक भूमध्य रेखा भी है जिस पर दोनों एक साथ हैं - दोनों पर ही हैदराबाद के व्यापारी सतीश बाबू सना से रिश्वत लेने का आरोप है। दोनों पर ही मीट व्यापारी मोईन कुरैशी को क्लीन चिट देने के लिए घूस लेने का आरोप है। यह बात और है कि ये आरोप किसी और ने नहीं बल्कि इन दोनों ने ही एक दूसरे के खिलाफ लगाए हैं। आखिर कौन हैं मोईन कुरैशी और सतीश बाबू सना?

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मोईन कुरैशी

कानपुर का मूल निवासी मोईन अख्तर कुरैशी का नाम देश के सबसे बड़े मीट निर्यातकों में शुमार किया जाता है। उसने अपनी पढ़ाई प्रख्यात दून स्कूल और दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से की है। इसीलिए उसके सभी बड़े और अमीर लोगों से संबंध हैं। 1993 में उसने रामपुर में एक छोटा सा बूचड़खाना खोल लिया। उसके बाद से अपने संपर्कों के बल पर उसने भवन निर्माण, फ़ैशन, गारमेंट से लेकर मीट निर्यात आदि क्षेत्रों की दो दर्जन से ज्यादा कंपनियां स्थापित कर लीं।

उसके पास 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। वह अपनी बेटी पर्निया की शादी में पाकिस्तानी गायक राहत फतेह अली खान को बुलाने की वजह से सुर्खियों में आया था जब इस सूफी गायक को हवाई अड्डे पर 56 लाख रुपये नकद पाकिस्तान ले जाने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था। हालांकि बाद में वह मामला भी रफादफा करा दिया गया था।

इनमें सबसे बड़ी कंपनी एएमक्यू एग्रो है जो मीट निर्यात के काम में लगी है। 1995 में उसने शराब व्यापारी पोंटी चड्ढा के साथ साझेदारी की थी लेकिन 2012 में पोंटी की हत्या के बाद उसने उसके बेटे मोंटी से साझेदारी खत्म कर दी। उसका अधिकतर निर्यात सऊदी अरब और दुबई में होता है। इसी वजह से भारत में केस दर्ज होने के पाद उसने दुबई में शरण ले ली। वहीं, वह मनोज प्रसाद और सोमेश प्रसाद से संपर्क में आया।

मोईन के सीबीआई के सभी निदेशकों से अच्छे संपर्क रहे हैं। वर्मा के पूर्ववर्ती एपी सिंह और रंजीत सिन्हा पर मोईन कुरैशी के जरिए रिश्वत लेने की जांच सीबीआई ही कर रही है। अब वर्मा और अस्थाना पर भी कुरैशी से घूस लेने के आरोप हैं।

सतीश बाबू सना

सतीश बाबू सना आंध्र प्रदेश के काकिंडा में बिजली विभाग का द्वितीय श्रेणी कर्मचारी था जो नौकरी छोड़ कर बेहतर भविष्य की तलाश में हैदराबाद चला गया। वहां, वह कई राजनीतिज्ञों के संपर्क में आया और उसने कई कंपनियां बना लीं। माना जा रहा है कि वह सभी दलों के लिए बिचौलिये का काम करने लगा था और ये कंपनियां काले धन को सफेद करने के लिए शुरू की गई थीं। साथ ही उसने पूर्वी गोदावरी जिले की क्त्रिस्केट संघ की राजनीति में भी जगह बना ली थी।

मोईन कुरैशी मामले में सबसे पहले उसका नाम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच मे 2015 में आया। लेकिन पिछले साल राकेश अस्थाना ने सीवीसी को लिखे पत्र में वर्मा पर सना से रिश्वत लेकर मोइन कुरैशी के खिलाफ मामला कमजोर करने का आरोप लगाया।

ईडी द्वारा अक्टूबर 2017 को दाखिल एक मामले की चार्जशीट में सना के बयानों का उल्लेख है।  वह एसबीएस ज्वैलर्स के मालिक सुरेश गुप्ता की जमानत के सिलसिले में वाईएसआर कांग्रेस के नेता बी सत्यनारायण के साथ दिल्ली आया था जहां उसकी मुलाकात कुरैशी से हुई। 2015-16 में तत्कालीन सीबीआई निदेशक एपी सिंह के कुरैशी के साख ब्लैकबेरी मैसेंजर (बीबीएम) पर हुई बातचीत में कई बार सना का नाम आया।
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मोहन और सोमेश प्रसाद

इन दोनों भाईयों के पिता दिनेश्वर सिंह भारत की विदेश में जासूसी करने वाली एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के निदेशक पद से रिटायर हुए थे। इसी वजह से इन दोनों के आईबी, रॉ, ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स जैसी जांच संस्थाओं में सभी शीर्ष अफसरों से मधुर संबंध रहे। खुद को निवेश सलाहकार बताने वाले दोनों भाईयों का मुख्य काम जांच एजेंसियों के चंगुल में फंसी बड़ी मछलियों को बचाने की जुगत लगाना था। दोनों भाई अपना काफी समय दुबई में बिताते थे जहां उन्होंने अपना अच्छा खासा पैसा निवेश कर रखा है।

मोईन कुरैशी मामले में बिचौलिए सतीश बाबू सना ने आरोप लगाया है कि मोहन प्रसाद ने उसे बताया कि उसके राकेश अस्थाना ने बहुत अच्छे संबंध हैं और पांच करोड़ रुपये की रिश्वत देने पर वह उसे और कुरैशी को इस मामले से साफ बचा लेगा। सना का दावा है कि प्रसाद ने उसके सामने अस्थाना से फोन पर रिश्वत की बात पक्की कर दी थी। उसी के बाद सना ने प्रसाद के ससुर को डेढ करोड़ रुपये की पहली किस्त दिल्ली के प्रेस क्लब की पार्किंग में की थी।

वर्मा के इशारे पर मोहन प्रसाद को गिरफ्तार कर लिया गया। मोहन के बचाने के लिए उसके भाई सोमेश ने अस्थाना से नौ बार फोन पर बात की जिसे सीबीआई ने रिकॉर्ड कर लिया। साथ ही व्हाट्सएप पर दोनों के बीच भेजे गए मैसेज भी। इससे पहले अस्थाना ने सीवीसी और कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे पत्रों में इसी तरह के आरोप वर्मा पर लगाए थे।
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