सैकड़ों करोड़ रुपये के आर्थिक अपराथ और संदिग्ध लेनदेन के एक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने राजस्थान और महाराष्ट्र में एक साथ 67 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। लगभग 820 करोड़ रुपये के संदिग्ध IMPS (तत्काल भुगतान सेवा) लेनदेन से संबंधित इस मामले में यूको बैंक के कई खातों की जांच हो रही है। 820 करोड़ रुपये के लेनदेन वाले इस मामले में छापेमारी को लेकर सीबीआई ने बयान जारी किया। इसके मुताबिक छह मार्च को राजस्थान के जोधपुर, जयपुर, जालौर, नागौर, बाड़मेर, फलौदी सहित कई शहरों में तलाशी अभियान चलाया गया।
यूको बैंक और आईडीएफसी बैंक के खाताधारकों के अकाउंट से संदिग्ध लेनदेन की खबरें
यूको बैंक के खातों से संदिग्ध लेनदेन मामले में राजस्थान के अलावा और महाराष्ट्र के पुणे में भी व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। इन ऑपरेशनों के दौरान, यूको बैंक और आईडीएफसी से संबंधित लगभग 130 आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए।
जांच के दौरान 40 मोबाइल और 43 डिजिटल डिवाइस समेत कई सामान जब्त
सीबीआई अधिकारियों ने छह मार्च के ऑपरेशन के दौरान 43 डिजिटल डिवाइस 40 मोबाइल फोन, 2 हार्ड डिस्क और 1 इंटरनेट डोंगल सहित कई अन्य आपत्तिजनक सामान भी जब्त किए गए। सीबीआई इनका फोरेंसिक विश्लेषण करा रही है। मौके पर मिले 30 संदिग्धों को भी सीबीआई ने अपनी जांच प्रक्रिया में शामिल किया है।
जोनल रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल समेत दो अधिकारी रिश्वत लेते गिरफ्तार
दिन की एक अन्य बड़ी कार्रवाई में सीबीआई ने दो अधिकारियों को गिरफ्तार भी किया। सीबीआई ने गुरुवार को भुसावल में मध्य रेलवे के जोनल रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल सुरेश चंद्र जैन समेत दो अधिकारियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। जैन भुसावल स्थित जोनल रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (जेडआरटीआई) के प्रिंसिपल हैं, जबकि दूसरा आरोपी योगेश ए देशमुख जेडआरटीआई के कार्यालय अधीक्षक हैं।
रेलवे को वाहन उपलब्ध कराने का ठेका
अधिकारियों ने कहा, अनुचित लाभ की मांग करने की शिकायत पर दोनों के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया है। आरोप है कि शिकायतकर्ता को मई 2023 से मई 2025 की अवधि के लिए रेलवे को वाहन उपलब्ध कराने के लिए अनुबंध प्राप्त हुआ था। अनुबंध के तहत वाहनों में से एक को प्रिंसिपल जैन के लिए तैनात किया गया था। वह मासिक बिलों को पारित करने के लिए रिश्वत की मांग कर रहे थे, लेकिन शिकायतकर्ता ने इसका भुगतान नहीं किया। इसके चलते जैन ने लॉग बुक पर समय पर हस्ताक्षर नहीं किए।
रिश्वतखोरी के आरोप, सीबीआई ने ऐसे बिछाया जाल
यह भी आरोप है कि अनुबंध फरवरी 2024 में समाप्त कर दिया गया था, लेकिन फर्म का जनवरी 2024 से फरवरी 2024 तक की अवधि का बिल लंबित था क्योंकि आरोपी ने लॉग बुक पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। लॉग बुक पर हस्ताक्षर करने के लिए जैन 5000 रुपये की मांग कर रहे थे। इसके अलावा, आरोपी ने रिश्वत की राशि बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी और अंत में 9000 रुपये पर समझौता हो गया। सीबीआई ने जाल बिछाया और शिकायतकर्ता को कार्यालय अधीक्षक के रूप में कार्यरत कर्मचारी देशमुख को 9000 रुपये की रिश्वत राशि सौंपने का निर्देश दिया। देशमुख ने रिश्वत राशि स्वीकार कर ली और इसे मुख्य आरोपी जैन को सौंप दी। दोनों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया गया।