राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल का फोन कभी टैप नहीं किया गया। इस मुद्दे को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करते हुए सीबीआई ने यह तर्क रखा। जनहित याचिका में कहा गया है कि पूर्व सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा तथा राकेश अस्थाना के विवाद के दौरान अजीत डोभाल का फोन गैरकानूनी तरीके से टैप किया गया था। इसकी जांच विशेष दल से कराई जाए।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने 15 जनवरी 2019 को केंद्र व सीबीआई को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा था। सीबीआई ने अपने जवाब में कहा कि किसी का भी फोन टैप करने के लिए तय प्रक्रिया है और उसका पालन किया जाता है।
याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता सार्थक चुतर्वेदी का आरोप है कि कई अधिकारियों ने निजी स्वार्थों के चलते पद का दुरुपयोग करते हुस् फोन टैप किए। याचिका में यह भी कहा गया है कि आलोक वर्मा व राकेश अस्थाना के बीच चल रहे विवाद के दौरान फोन टैपिंग करने वाली विशेष यूनिट को डोभाल व अस्थाना के बीच हुई बातचीत की जानकारी थी, क्योंकि डोभाल का फोन टैप किया जा रहा था।
याचिका में कहा गया है कि इस बात का खुलासा सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई के डीआईजी मनीष सिन्हा के आवेदन पर सुनवाई के दौरान हुआ था। सिन्हा विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ मामले की जांच कर रहे थे और उनका ट्रांसफर कर दिया गया था।
याचिका में सिन्हा के आवेदन का हवाला देते हुए यह भी कहा गया था कि डोभाल ने अस्थाना को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात बताई थी। अस्थाना ने डोभाल से आग्रह किया था कि उनकी गिरफ्तारी न हो। इसके बाद अस्थाना के खिलाफ जांच करने वाली पूरी टीम का अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव ने ट्रांसफर कर दिया था।