सीबीआई ने 515 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी के मामले में कम्प्यूटर बनाने वाली कंपनी आरपी इंफोसिस्टम के दो निदेशकों शिवाजी पांजा और कौस्तव राय को गिरफ्तार किया है। केनरा बैंक की शिकायत पर ये गिरफ्तारियां की गईं।
सीबीआई ने कहा कि बैंक की तरफ से फर्जीवाड़ा एवं आपराधिक षडयंत्र के संबंध में लिखित शिकायत मिलने के बाद इनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। प्राथमिकी में कंपनी के उपाध्यक्ष देवनाथ पाल और विजय बाफना का भी नाम शामिल है। शिकायत में कहा गया है कि कंपनी ने केनरा बैंक एवं नौ अन्य बैंकों के एक समूह के साथ 515 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है।
26 फरवरी को ही सीबाआई में
पीएनबी के डिप्टी मैनेजर प्रसाद राव ने प्राथमिकी दर्ज करवाई थी। बैंक ने शिवाजी पांचा, कौस्तुभ रे, विनय बफाना और देवनैश पाल के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में सामने आया कि इन्होंने केनरा बैंक के साथ-साथ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, सेंट्रल बैंक, पंजाब नैशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और फेडरल बैंक के कॉन्सोर्टिस से कर्ज लिया था।
केनरा बैंक ने आरोप लगाते हुए कहा कि आरपी इंफोसिस ने बेइमानी से बिक्री को लोन अकाउंट के जरिए नहीं दिखाया और पूरा पैसा उड़ा दिया। बैंक ऑफ बड़ोदा ने उनके किलाफ साल 2015 में 77 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सीबीआई के पास दर्ज कराया था। इस मामले में चेन्नई स्थित दफ्तर और सुब्रह्मण्यम के आवास पर छापे भी मारे थे।
पीएनबी को लगे 12,600 करोड़ के चूने के बाद से
बैंख धोखाधड़ी की घटनाएं और भी बढ़ती जा रही हैं। गौरतलब है कि इससे पहले नीरव मोदी और गीतांजली जेम्स के मालिक मेहुल चोकसी से संबंधित पीएनबी धोखाधड़ी मामले में 1,300 करोड़ रुपये के घोटाले के बाद बैंक को लगी कुल चपत की रकम बढ़कर 12,600 करोड़ रुपये हो गई है।