सीबीआई ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के उनके दिल्ली, मुंबई और चेन्नई के घर और दफ्तर ठिकानों पर छापेमारी की । साथ ही मुंबई के चर्चित शीना बोरा मर्डर केस के मुख्य आरोपी पीटर मुखर्जी के मुंबई के ठिकानों पर भी छापा मारा।
मालूम हो कि शीना बोरा मर्डर केस के मुख्य आरोपी इंद्राणी और पीटर मुखर्जी आईएनएक्स मीडिया के निदेशक रह चुके हैं। इसके अलावा कार्ति चिदंबरम की एक और कंपनी चैस मैनेजमेंट सर्विसेज पर भी सीबीआई ने केस दर्ज किया है। आरोप है कि चिदंबरम के वित्तमंत्री रहते हुए ही आईएनएक्स मीडिया को स्वीकृति दी गई थी। आइए जानते हैं चिदंबरम परिवार और पीटर मुखर्जी के बीच क्या कनेक्शन है।
-पी. चिदंबरम के ठिकानों पर सीबीआई छापे एफआईपीबी बोर्ड की ओर से आईएनएक्स मीडिया ( अब 9एक्स मीडिया) को क्लीयरेंस देने में नियमों के कथित उल्लंघन के आरोप में मारे गए हैं। 2007 में जब आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश क्लीयरेंस दी गई थी तो उस दौरान चिदंबरम वित्त मंत्री थे और कंपनी का मालिकाना हक पीटर और इंद्राणी मुखर्जी के पास था।
-कहा जा रहा है कि आईएनएक्स मीडिया को यह मंजूरी चिदंबरम के बेटे के कार्ति चिदंबरम ने दिलवाई। आईएनएक्स मीडिया को सिर्फ चार करोड़ रुपये विदेशी निवेश की अनुमति थी लेकिन वास्तविक निवेश काफी ज्यादा हुआ।
-कार्ति के कहने की वजह से नियमों के उल्लंघन के बावजूद आईएनएक्स मीडिया में विदेशी निवेश को हरी झंडी दे दी गई। सीबीआई का कहना है कि इस सौदे में कार्ति ने रिश्वत खाई। एक रिपोर्ट के मुताबिक कार्ति को 90 लाख रुपये मिले। सीबीआई की एफआईआर में पी. चिदंबरम का नाम नहीं है लेकिन कहा जा रहा है कि उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है।
सूत्रों के मुताबिक, आईएनएक्स मीडिया सौदे के कुछ सुराग तब सामने आए जब सनसनीखेज शीना बोरा की हत्या के आरोप में पीटर मुर्खर्जी के वित्तीय लेनदेन की छानबीन की गई थी।
हालांकि इस पूरे मामले में दर्ज एफआरआई में कार्ति चिदंबरम का नाम नहीं है लेकिन उनकी भूमिका का उल्लेख जरूर है। कहा गया कि बोर्ड ने निवेश की मंजूरी नहीं दी मगर तत्कालीन वित्त मंत्री ने निवेश के प्रस्ताव का अनुमोदन किया था।