मीडिया समूह में विदेशी निवेश की अनुमति दिलाने के लिए घूस लेने के मामले में पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम से सीबीआई ने कई घंटे तक पूछताछ की है। जानकारी के मुताबिक, उनसे जांच एजेंसी के अफसरों ने सुबह 8 से पूछताछ शुरू की थी।
इस दौरान सीबीआई ने कार्ति चिदंबरम के सामने सबूत रखकर उनकी कंपनी चैस मैनमेंट लिमिटेड और विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड यानि एफआईपीबी क्लीयरेंस से संबंधित दस्तावेजों को लेकर भी पूछताछ की। बता दें कि शुक्रवार को
सीबीआई के दिल्ली स्थित हेडक्वार्टर में कार्ति के वकील ने भी उनसे करीब एक घंटे की मुलाकात की।
गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार (1 मार्च) को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कार्ति चिदंबरम को पांच दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजा है। इस दौरान करीब चार घंटे चली सुनवाई में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई थी। कई बार जज को हस्तक्षेप कर दोनों वकीलों को शांत कराना पड़ा। अब सीबीआई 6 मार्च को कार्ति को अदालत में पेश करेगी।
वहीं, इस मामले में कोर्ट ने आरोपी कार्ति के चार्टेड अकाउंटेंट एस भास्कर रमन की जमानत याचिका पर 7 मार्च के तक के लिए फैसला सुरक्षित रखा । सुनवाई के दौरान पी चिदंबरम भी उपस्थित रहे। सीबीआई की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कार्ति के लिए 14 दिन की रिमांड की मांग की थी।
बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि सीबीआई ने पूछताछ कर ली है। ऐसे में उनके मुवक्किल को रिमांड पर भेजने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा उनके मुवक्किल कोर्ट की अनुमति विदेश गए और हर बार लौटे। उन्हें लंदन से लौटने पर बुधवार को केवल इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वह कांग्रेस के नेता के बेटे हैं। जिस कंपनी एडवांटेज स्ट्रेटजी का जिक्र सीबीआई कर रही है। उसमें कार्ति न शेयरधारक हैं और न ही उसके निदेशक हैं।
सीबीआई अधिवक्ता ने जमानत पर आपत्ति करते हुए कहा कि इंद्राणी मुखर्जी ने पूछताछ में कहा था कि वह एफआईपीबी की अनुमति के सिलसिले में कार्ति से दिल्ली के पांच सितारा होटल में मिली थीं और उन्होंने दस लाख डॉलर की घूस मांगी थी। उन्होंने कहा जांच अभी आरंभिक स्थिति में है ऐसे में जमानत नहीं दी जानी चाहिए।
2007 का मामला
एजेंसी का आरोप है कि कार्ति ने मीडिया हाउस में विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एफआईपीबी) की अनुमति दिलाने के लिए 2007 में दस लाख डॉलर की घूस मांगी थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी एक मीडिया समूह, इंद्राणी मुखर्जी, उसके पति पीटर मुखर्जी व अन्य कई लोगों के खिलाफ मनी लांड्रिंग रोकथाम अधिनियम का मुकदमा दर्ज किया था। मीडिया समूह पर गलत तरीके से मॉरीशस से पैसा मंगाकर कंपनी में लगाने का आरोप है।