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Corruption Case: देशमुख की जमानत याचिका के खिलाफ सीबीआई ने दाखिल किया जवाब, सुप्रीम कोर्ट से मिली थी राहत

Fri, 14 Oct 2022 10:06 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

देशमुख को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में नवंबर 2021 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किया गया था। वह अभी मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद हैं।
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महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख। - फोटो : ANI
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विस्तार
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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने भ्रष्टाचार के एक मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख की जमानत याचिका का विरोध किया है। एजेंसी ने शुक्रवार को अपना जवाब दाखिल किया है। 

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देशमुख को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में नवंबर 2021 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार किया गया था। वह अभी मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद हैं।

इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते 71 वर्षीय राकांपा नेता को जमानत दे दी थी। इसके बाद उन्होंने विशेष सीबीआई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया था कि मुंबई के पूर्व पलिस आयुक्त परमबीर सिंह और पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने साठगांठ कर काम किया था । देशमुख ने इस याचिका में सीबीआई के उन बयानों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए थे जिन पर आधारित मामला था। 

सीबीआई की ओर से पेश हुए अतिरिक्त लोक अभियोजन आशीष चव्हाण ने कहा, हम उनकी जमानत का विरोध करते हैं। हमने जमानत याचिका में दिए गए सभी तर्कों का विरोध किया है। 
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इससे पहले परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री देशमुख ने पुलिसकर्मियों को शहर के रेस्तरां और बार से प्रति माह सौ करोड़ रुपये लेने का निर्देश दिया था। देशमुख ने इन आरोपों की खंडन किया था। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई को उनके खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था और उन्हें पद से हटना पड़ा था। 

सीबीआई के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में पता चला कि आरोपी और अन्य ने कथित तौर पर सार्वजनिक कर्तव्यों का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास किया। 

देशमुख को जसलोक अस्पताल ले जाया गया
महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और राकांपा नेता अनिल देशमुख को आर्थर रोड जेल से जसलोक अस्पताल ले जाया गया। विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा अनिल देशमुख को एक निजी अस्पताल में एंजियोग्राफी कराने की अनुमति देने के बाद उन्हें आज जसलोक अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

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जातीय टिप्पणी करने पर एक अधिवक्ता को छह माह की जेल 

सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
महाराष्ट्र में ठाणे जिले की एक अदालत ने जिरह के दौरान एक व्यक्ति के खिलाफ जातीय टिप्पणी करने पर एक अधिवक्ता को छह माह की जेल की सजा सुनाई है। साथ ही 1,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। विशेष न्यायाधीश ए.एस. भागवत ने वकील राजन सालुंके को बुधवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत दोषी ठहराया। विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) रेखा हिवराले ने अदालत से कहा कि शिकायतकर्ता ने पालघर जिले के खारीवली गांव के इस वकील को 2015 में एक लाख रुपये बतौर कर्ज दिए थे।लेकिन, वकील ने यह राशि नहीं लौटाई। कार्यालय में पैसे मांगने पर वकील ने शिकायतकर्ता को गालियां दीं तथा जातिसूचक टिप्पणी की। इसके बाद थाने में मामला दर्ज किया गया। आरोपी की ओर से पेश वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को भूमि विवाद की वजह से झूठे मामले में फंसाया गया है। कोर्ट में जिरह के दौरान जातीय टिप्पणी कर गंभीर अपराध किया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी ने वैसा अपराध किया है, जिससे समाज का वातावरण खराब होगा।
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