केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक संदिग्ध चीनी नागरिक से जुड़े कथित घोटाले की जांच अपने हाथ में ले ली है, जिसमें भारतीय नागरिकों को निवेश, ऋण और नौकरी के अवसरों के नाम पर निशाना बनाया गया था।
सीबीआई के मुताबिक धोखाधड़ी के केंद्र में रहने वाला यह मर्चेंट लगभग 16 अलग-अलग बैंक खातों को नियंत्रित करता था, जहां लगभग 357 करोड़ रुपये की भारी राशि जमा की गई थी।
साइबर अपराधियों को लक्षित करने वाले ऑपरेशन चक्र -2 के तहत, केंद्रीय जांच एजेंसी ने हाल ही में बेंगलुरु, कोचीन और गुरुग्राम में तलाशी ली थी और इससे शेल कंपनियों के निदेशकों की कथित गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए पर्याप्त सबूत मिले थे।
बयान के अनुसार, एजेंसी ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के इनपुट के आधार पर घोटाले के संबंध में मामला दर्ज किया, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है।
इसके अलावा इस फ्रॉड को निवेश, ऋण और नौकरी के अवसरों के नाम पर विदेशी घोटालेबाजों द्वारा भारतीय नागरिकों पर किए जा रहे परिष्कृत, संगठित साइबर अपराध से संबंधित बताया जा रहा है।
कई पोंजी योजनाओं का लिया सहारा
सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि धोखेबाजों ने कथित तौर पर पोंजी योजनाओं और आकर्षक अंशकालिक नौकरियों के वादों के साथ पीड़ितों को लुभाने की कोशिश की। इस अपराध को अंजाम देने के लिए उन्होंने विभिन्न सोशल मीडिया और विज्ञापन, चैट एप्लिकेशन और एसएमएस का सहारा लिया।
अधिकारी ने बयान में कहा कि यूपीआई खातों के एक जटिल नेटवर्क के माध्यम से गलत तरीके से कमाए गए धन को सफेद किया गया, जो अंततः गलत प्रमाण-पत्रों के जरिये इस राशि को क्रिप्टोकरेंसी या सोने में परिवर्तित किया गया।
बयान में कहा गया है कि सीबीआई ने 137 शेल कंपनियों की पहचान की है, जो ज्यादातर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज, बेंगलुरु के साथ पंजीकृत हैं, जिनका इस्तेमाल भोले-भाले निवेशकों से इकट्ठा किए गए पैसे को निकालने के लिए किया जाता था।
सिंगापुर पुलिस के इनपुट के आधार पर मामला दर्ज किया
ऑपरेशन के तहत, सीबीआई ने इंटरपोल के माध्यम से सिंगापुर पुलिस के इनपुट के आधार पर एक और मामला भी दर्ज किया है, जिसमें दक्षिण पूर्व एशियाई देश के 400 नागरिकों को भारत स्थित साइबर अपराधियों द्वारा निशाना बनाया गया था। एजेंसी ने सिंगापुर के नागरिकों के खिलाफ 300 साइबर धोखाधड़ी का पता लगाया है, जिसमें 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फैले 100 से अधिक भारतीय बैंक खाते शामिल हैं।