कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के पास मौजूद जानकारी के मुताबिक, राव की पत्नी मनेम संध्या ने इस कंपनी में अलग-अलग समय पर कुल मिलाकर 60 लाख रुपये का निवेश किया था, जिसमें 38.27 लाख रुपये को बतौर कर्ज दिखाया गया था। इस निवेश के लिए संध्या ने आरओसी से अपने पति नागेश्वर राव का नाम और उनका पता छिपाया था। उन्होंने एम. संध्या के नाम से निवेश करते हुए पति की जगह पिता चिन्नम विष्णु नारायण का नाम दिया था।
जमीन हथियाने के भी हैं राव पर आरोप
राव पर 2011 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक महिला की जमीन हथियाने का भी आरोप लगा। अदालत में चल रहे इस मामले में 2015 में अचानक महज 7 लाख रुपये में समझौता हो गया, जबकि उस जमीन का बाजार भाव कहीं ज्यादा था। इसी तरह राव पर हिंदुस्तान टेलीप्रिंटर लिमिटेड की सिडको इंडस्ट्रियल एरिया की बहुमूल्य जमीन को आवासीय बनाकर कौड़ियों के भाव बेचने के मामले में तीन साल तक कोई कार्रवाई नहीं करने का भी आरोप है।
सीबीआई के दक्षिण भारत कार्यालय के तत्कालीन प्रमुख एम. नागेश्वर राव के खिलाफ लगे आरोपों की सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को भी जानकारी थी। उन्होंने इसकी जांच बंगलूरू स्थित सीबीआई की बैंकिंग और गंभीर फ्राड इकाई को सौंपी थी। उसकी रिपोर्ट के आधार पर पर वर्मा ने राव को चेन्नई से हटाकर चंडीगढ़ भेज दिया था, लेकिन सीवीसी से अनुमति न मिलने की वजह से वे राव को एजेंसी से नहीं हटा पाए थे।
क्या सीबीआई में कोई साफ सुथरा व्यक्ति नहीं रह गया है?
सीबीआई निदेशक को हटाने की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का कहना है कि आखिर सीबीआई का प्रमुख किसी ऐसे आदमी को ही क्यों बनाया जा रहा है, जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। क्या सीबीआई में कोई साफ सुथरा व्यक्ति नहीं रह गया है या निदेशक बनने के लिए ऐसे आरोप लगे होना जरूरी योग्यता है? वर्मा और अस्थाना पर ये आरोप लगे, अब उनके बाद निदेशक का कार्य ग्रहण करने वाले राव पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं।