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सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव का हो सकता है तबादला

Thu, 10 Jan 2019 06:46 PM IST
अमर शर्मा जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
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एम नागेश्वर राव - फोटो : PTI
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सीबीआई में एक बार फिर उठापटक शुरू हो गई है। आलोक वर्मा द्वारा दफ्तर ज्वाइन करने के बाद अब अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव का तबादला होने के आसार बन गए हैं। सूत्र बताते हैं कि उन्हें चंडीगढ़ भेजे जाने की संभावना है। राव ने आलोक वर्मा के चहेते अफसरों को इधर-उधर कर दिया था। बुधवार को वर्मा ने भी निदेशक पद का कार्यभार संभालते ही अपने उन सभी अफसरों को वापस बुला लिया है। वर्मा ने वे सभी पोस्टिंग ऑर्डर रद्द कर दिए, जो नागेश्वर राव ने जारी किए थे।
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आलोक वर्मा को जब गत अक्तूबर माह में छुट्टी पर भेजा गया तो उनकी जगह चेन्नई जोन के नागेश्वर राव को सीबीआई के अंतरिम निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बाद में आलोक वर्मा जब इस फैसले के खिलाफ अदालत में पहुंचे तो वहां से उन्हें फौरी तौर पर राहत तो नहीं मिली, लेकिन नागेश्वर राव से कहा गया कि वे कोई नीतिगत फैसला न लें। शुरुआत में माना गया कि अदालत के इस आदेश में तबादलों पर भी रोक लगाई गई है। हालांकि ऐसी नहीं हुआ और राव ने तुरत-फुरत आलोक वर्मा के खास अफसरों को बाहर भेज दिया।

राकेश अस्थाना के भ्रष्टाचार मामले की जांच करने वाले डीएसपी एके बस्सी को तो अंडमान भेजा गया। बाद में उन्होंने अपने तबादले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इसी तरह वर्मा के विश्वस्त दूसरे अफसरों को भी अहम पोस्टिंग से हटाकर दूसरी जगह या कम महत्वपूर्ण ब्रांच में भेज दिया गया।

वर्मा के ज्वाइन करते ही टकराहट का माहौल बन गया

सूत्र बताते हैं कि वर्मा के दोबारा आते ही सीबीआई मुख्यालय में टकराहट का माहौल बन गया है। चूंकि जिन अफसरों को नागेश्वर राव ने अपने विश्वास में लेकर उन्हें अहम पदों पर बैठाया था, अब वे फिर से बोरिया-बिस्तर बांधने को मजबूर हो गए हैं। वर्मा ने आते ही पुरानी सभी फाइलें भी तलब की हैं।
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नागेश्वर राव के कार्यकाल के दौरान जो भी फैसले लिए गए, उनकी पड़ताल हो रही है। ऐसे में अब ये दोनों अधिकारी सीबीआई मुख्यालय में रहते हैं तो इसका असर कामकाज पर पड़ेगा। यही वजह है कि नागेश्वर राव को अब चंडीगढ़ जोन में भेजे जाने के आसार हैं।

नागेश्वर राव पर भी लग चुके हैं कई आरोप

वकील प्रशांत भूषण और अन्य कई लोगों ने उन पर कथित तौर से पिछले मामलों को लेकर सवाल उठाए थे। इनका कहना था कि नागेश्वर राव पर भी अपनी ड्यूटी में कथित तौर से कई तरह की अनियमितताएं बरतने के आरोप लगे हैं। वीजीएन डेवलेपर और एचटीएल के दफ्तरों पर सर्च करने के मामले में सीबीआई फेल रही, इस बाबत भी राव पर निशाना साधा गया। उड़ीसा के पूर्व मुख्य सचिव राम मोहना राव के साथ उनके घनिष्ठ संबंधों के चलते कथित तौर पर वीजीएन केस को शांत तरीके से दफन कर दिया।

इन दोनों अधिकारियों की मिलीभगत से मद्रास हाईकोर्ट में यह कहा गया कि वीजीएन केस से सरकार को केवल 53.50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि असल नुकसान काफी ज्यादा था। हाईकोर्ट इनकी बातों से सहमत नहीं हुआ और बाद में इस केस की जांच ईडी को सौंप दी गई। ईडी ने एक ही झटके में वीजीएन की 115 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच कर दी।

आरोप यह भी है कि नागेश्चर राव ने इस मामले में जांच को मॉनीटर तक नहीं किया। इस केस में बड़े पैमाने पर बैंक एवं दूसरे अफसरों को घूस दी गई, लेकिन सीबीआई चुप रही। कहा गया कि नागेश्वर राव ने अपने जांच अधिकारी पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने का दबाव भी डाला। इसके अलावा उनकी पत्नी ने भी ऐंजेला मरसनटाइल प्राइवेट लि. में साठ लाख रुपये निवेश किए थे। यह मामला भी खासी चर्चा में रहा था।
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