CBI: सीबीआई ने जेएनपीटी के पूर्व मुख्य प्रबंधक और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स समेत कई निजी कंपनियों व अधिकारियों पर 800 करोड़ रुपये के ठेके में भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि ठेके के अनुमान को जानबूझकर बढ़ाकर दिखाया गया और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया। इससे 2003 से 2019 के बीच सरकार को करीब 804 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड (टीसीई) के प्रोजेक्ट निदेशक और अन्य लोगों के खिलाफ करीब 800 करोड़ रुपये के ठेके (कॉन्ट्रैक्ट) में भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर दर्ज की है।
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जिनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है उनमें जेएनपीटी के चीफ मैनेजर सुनील कुमार मदाभावी, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड के वरिष्ठ जनरल मैनेजर देवदत्त बोस, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का मुंबई मुख्यालय, बोस्कालिसस्मिट इंडिया एलएलपी, जान डे नुल ड्रेजिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, अन्य आज्ञात सरकारी और निजी अधिकारी शामिल हैं।
सीबीआई ने बताया कि सरकारी पद का अधिकारियों ने दुरुपयोग किया ताकि ठेके लेने वालों को आर्थिक लाभ पहुंचाया जा सके। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सीबीआई के अनुसार, जेएनपीटी के बंदरगाह अधिकारियों और निजी कंपनियों के अधिकारियों के बीच मिलीभगत हुई और ठेके के अनुमानों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। ऐसा करके देश में प्रतियोगिता (कंपटीशन) को सीमित किया गया, ताकि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को फायदा मिल सके। स्वतंत्र विशेषज्ञों और संगठनों की रिपोर्ट को ठुकराकर ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसके चलते सरकार को 2003 से 2014 के बीच परियोजना के पहले चरण में 365.90 करोड़ रुपये और 2013 से 2019 के बीच परियोजना के दूसरे चरण में 438 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।