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CBI: भ्रष्ट बैंक अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों अटक रही? सीबीआई ने वित्त मंत्रालय और बैंकों के साथ की अहम बैठक

Fri, 26 Jun 2026 11:01 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

CBI On Bank Fraud Cases: सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामलों में जांच और अभियोजन के लिए जरूरी मंजूरियों में देरी पर चिंता जताई है। एजेंसी का कहना है कि बैंकों द्वारा समय पर मंजूरी नहीं देने से जांच प्रभावित हो रही है। इस मुद्दे पर सीबीआई ने वित्त मंत्रालय, बैंकों और मुख्य सतर्कता अधिकारियों के साथ बैठक की। आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...
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सीबीआई ने जताई चिंता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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देश में बैंक धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच में देरी को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ा मुद्दा उठाया है। सीबीआई ने कहा है कि बैंक अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने और आरोपपत्र दाखिल करने के लिए जरूरी मंजूरी समय पर नहीं मिल रही है। इससे न केवल जांच प्रभावित हो रही है, बल्कि कई मामलों में अभियोजन की प्रक्रिया भी धीमी पड़ रही है। इस मुद्दे पर सीबीआई ने वित्त मंत्रालय, बैंकों और मुख्य सतर्कता अधिकारियों (सीवीओ) के साथ बैठक कर चिंता जताई।

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नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग, विभिन्न बैंकों और बैंकों के सीवीओ के साथ लंबित मामलों की समीक्षा की। बैठक में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए और धारा 19 के तहत आवश्यक मंजूरी, बैंक धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े दस्तावेजों में देरी, वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस), हालिया अदालतों के फैसलों और म्यूल अकाउंट जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सीबीआई ने मंजूरी में देरी को लेकर क्या चिंता जताई?

सीबीआई ने बताया कि कई मामलों में बैंकों की ओर से अपने अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं दी जाती है। इसके कारण भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई प्रभावित होती है। कुछ मामलों में मंजूरी नहीं मिलने से मुकदमों की सुनवाई विशेष अदालतों के बजाय सामान्य अदालतों में स्थानांतरित हो जाती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया और लंबी हो जाती है।

जांच शुरू करने के लिए किन मंजूरियों की जरूरत होती है?

सीबीआई के लिए किसी बैंक अधिकारी के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य है। वहीं, आरोपपत्र दाखिल करने से पहले धारा 19 के तहत अभियोजन की स्वीकृति लेनी होती है। एजेंसी का कहना है कि इन मंजूरियों में देरी से जांच और मुकदमे दोनों प्रभावित होते हैं।

बैंकों से जुड़े कौन-कौन से मुद्दों पर चर्चा हुई?

बैठक के दौरान बैंक धोखाधड़ी से जुड़े लंबित दस्तावेज, शिकायतों के निपटारे, वन टाइम सेटलमेंट मामलों और म्यूल अकाउंट से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा की गई। सीबीआई के अनुसार, बैंकवार समीक्षा की गई और कई लंबित मामलों का समाधान भी किया गया। एजेंसी ने कहा कि बैंकों और सीबीआई के बीच दस्तावेजों को समय पर साझा करने की आवश्यकता पर सहमति बनी है।

बैठक का क्या निष्कर्ष निकला?

बैठक के अंत में सीबीआई और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बीच मौजूदा सहयोग को आगे भी बनाए रखने पर सहमति बनी। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मंजूरी की प्रक्रिया को और तेज और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया। सीबीआई ने कहा कि बैंक धोखाधड़ी के मामलों की जांच में तेजी लाने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

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