सीबीआई ने आईआईटीएम (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटेयरोलॉजी) के वैज्ञानिक गुरफान बेग और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है। SAFAR प्रोजेक्ट के तहत अहमदाबाद में धांधली के आरोप में यह केस दर्ज किया गया है। गुरफान बेग और अन्य पर आरोप है कि इन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए चीन में बने एयर क्वालिटी और मौसम की जानकारी देने वाले एलईडी बोर्ड को कथित मंजूरी दी। गौरतलब है कि गुरफान बेग पर आरोप है कि पुणे में भी ऐसे ही एलईडी बोर्ड को गलत तरीके से मंजूरी दी गई। इस मामले में भी गुरफान बेग आरोपी है। सीबीआई इस मामले की भी जांच कर रही है।
क्या है मामला
आरोप है कि गुरफान बेग और अन्य अज्ञात अधिकारी ने टेंडर के नियमों और शर्तों का उल्लंघन करते हुए सिस्टम फॉर एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) प्रोजेक्ट के तहत चीन में बने एलईडी बोर्ड की खरीद को मंजूरी दी। 12 एलईडी बोर्ड की खरीद के लिए मुंबई स्थित कंपनी वीडियो वॉल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को टेंडर जारी किया गया था। कंपनी के निदेशक अनिल गिरकर ने दावा किया कि एलईडी के इक्विपमेंट कंपनी द्वारा ही बनाए जाते हैं। हालांकि जांच में पता चला कि कंपनी ने चीन से एलईडी मंगवाकर असेंबल किए थे। इसके बावजूद गुरफान बेग और अन्य अज्ञात अधिकारी ने इन्हें मंजूरी दे दी थी। सीबीआई की एफआईआर में कंपनी और इसके निदेशक का भी नाम है।
एलईडी सप्लायर कंपनी का नाम भी एफआईआर में शामिल
सीबीआई का कहना है कि चीन से मंगवाए गए प्रति एलईडी की कीमत करीब 4.50 लाख रुपये थी, इस तरह 12 एलईडी 54 लाख रुपये के थे लेकिन कंपनी को प्रति एलईडी 14.70 लाख और कुल 1.76 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। साथ ही तकनीकी कमेटी की शर्तों का भी उल्लंघन किया गया। सीबीआई ने ऐसे ही पुणे के मामले में भी गुरफान बेग और वीडियो वॉल कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया हुआ है। आरोप है कि कंपनी को टेंडर देने के लिए भी कंपनी के 50 करोड़ सालाना के टर्नओवर की सीमा को घटाकर तीन करोड़ कर दिया गया था। साथ ही टेंडर भरने वाली हैदराबाद की कंपनी एमआईसी इलेक्ट्रोनिक्स के दावे को भी गलत आधार पर खारिज कर दिया गया था।
गुरफान बेग ने पुणे मामले में अपना नाम हटवाने के लिए विशेष अदालत में याचिका दायर की थी लेकिन कोर्ट ने गुरफान बेग की याचिका को खारिज कर दिया था और उनकी भूमिका को संदिग्ध माना था।