फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीबीआई: सिम बॉक्स ऑपरेशन, साइबर फ्रॉड के लिए सिम कार्ड की गैर-कानूनी बिक्री के लिए डिस्ट्रीब्यूटर गिरफ्तार

Sat, 12 Sep 2026 10:19 PM IST
पवन पांडेय डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीबीआई ने बिहार के वैशाली और ओडिशा के जगतसिंहपुर में 10 ठिकानों पर छापेमारी कर अवैध सिम बॉक्स नेटवर्क का पर्दाफाश किया। एक एयरटेल एरिया डिस्ट्रीब्यूटर गिरफ्तार हुआ। जांच में 1300 से अधिक सिम और देशभर के 73 साइबर अपराधों का लिंक मिला। इनमें डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
विज्ञापन
सीबीआई - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सीबीआई ने बिहार के वैशाली जिले और ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में 10 जगहों पर छापेमारी की है। साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल हो रहे गैर-कानूनी सिम बॉक्स ऑपरेशन के सिलसिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। दस जगहों पर तलाशी के दौरान, मोबाइल फोन, लैपटॉप और सिम कार्ड जैसे कई डिजिटल डिवाइस से आपत्तिजनक सामान मिला है। महुआ, वैशाली के एयरटेल एरिया डिस्ट्रीब्यूटर को बड़ी संख्या में धोखाधड़ी से सिम कार्ड जारी करने और उन्हें गैर-कानूनी सिम बॉक्स ऑपरेशन में इस्तेमाल के लिए आगे भेजने में उसकी भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया है।
विज्ञापन


सीबीआई गैर-कानूनी सिम बॉक्स ऑपरेशन के एक मामले की जांच कर रही है, जिसका पता पिछले साल बिहार के सुपौल जिले में चला था। बाद में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। जिस घर में सिम बॉक्स चलाया जा रहा था, वहां 1300 से ज्यादा सिम कार्ड मिले थे। सीबीआई ने ऐसा डेटा भी इकट्ठा किया है, जिससे पता चलता है कि यह सिम बॉक्स ऑपरेशन पूरे भारत में साइबर क्राइम के कम से कम 73 मामलों से जुड़ा था। इसमें 'डिजिटल अरेस्ट' के तरीके से किए गए अपराध भी शामिल हैं।

1300 से ज्यादा सिम कार्ड से जुड़े डेटा का बारीकी से विश्लेषण किया गया और कुछ संदिग्ध 'पॉइंट्स ऑफ सेल' (सिम बेचने वाली जगहों) की पहचान की गई। पता चला कि ज्यादातर सिम कार्ड बिहार और ओडिशा से जारी किए गए थे। इनमें से 700 से ज्यादा सिम कार्ड एयरटेल के एक एरिया डिस्ट्रीब्यूटर ने बिहार के वैशाली जिले में सिम कार्ड बेचने वाले एक दर्जन से ज्यादा 'पॉइंट्स ऑफ सेल' की जानकारी (क्रेडेंशियल्स) का गलत इस्तेमाल करके जारी किए थे। 
विज्ञापन


जांच के दौरान कई ग्राहकों ने यह भी बताया है कि उन्हें पता ही नहीं था कि उनके नाम पर कोई सिम कार्ड जारी किया गया है। ऐसा या तो उन्हें धोखा देकर किया गया (जैसे जब वे किसी असली काम से सिम कार्ड प्रोवाइडर के पास गए तो उनसे कई बार ई-केवाईसी के लिए मंजूरी ले ली गई) या फिर किसी और मकसद से लिए गए उनके बायोमेट्रिक डेटा का गलत इस्तेमाल करके किया गया। बिहार सरकार द्वारा यह मामला सीबीआई को सौंपा गया। इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी, जबरन वसूली (बीएनएस के तहत), पहचान की चोरी, कंप्यूटर से जुड़े अपराध (आईटी एक्ट के तहत) और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2022 के तहत अन्य अपराधों की जांच शामिल है। 

सीबीआई उन लोगों और संस्थाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के अपने संकल्प को दोहराती है जो टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का गलत इस्तेमाल करके साइबर धोखाधड़ी में मदद करते हैं। यह नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह भी देती है और आगाह करती है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई कॉन्सेप्ट नहीं होता है। आम लोगों से अपील की जाती है कि वे कानून लागू करने वाली एजेंसियों के नाम पर पैसे मांगने वाले कॉल या धोखाधड़ी वाली निवेश योजनाओं के झांसे में न आएं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें