केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सूचना के अधिकार कानून के तहत उन लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) की संख्या बताने से इनकार कर दिया है जो उसने साल 2014 और 2019 के बीच बैंक और वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में आरोपियों को पकड़ने के लिए जारी किए हैं। सीबीआई ने कहा कि इससे जारी जांच पर प्रभाव पड़ सकता है।
यह जवाब पुणे के आरटीआई कार्यकर्ता विहार दुर्वे की ओर से सीबीआई, विदेश मंत्रालय और वित्त मंत्रालय में आरटीआई अर्जी दायर करने के बाद आया है। उक्त अर्जी के माध्यम से बैंक धोखाधड़ी के फरार आरोपियों के खिलाफ जांच के संबंध में जानकारी मांगी गई थी।दुर्वे ने कहा कि एजेंसी द्वारा अपने अधिकारियों द्वारा भगोड़ों को वापस लाने के लिए कानूनी और यात्रा सेवाओं पर किए गए खर्च के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई।
एक आरटीआई आवेदनकर्ता के अनुसार सूचना मांगने वाले जांच एजेंसी ने स्वयं द्वारा एलओसी जारी करने के बाद सक्षम प्राधिकारियों की ओर से प्राप्त आदेशों की जानकारी भी देने से इनकार कर दिया। सीबीआई ने इसके लिए आरटीआई कानून की धारा 8(1) (एच) का उल्लेख किया जो ऐसी सूचना मुहैया कराने से उसे छूट प्रदान करता है जो किसी आरोपी की गिरफ्तारी या अभियोजन पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।
आवेदनकर्ता ने कहा कि सीबीआई ने जहां धारा 8(1) (एच) और आरटीआई कानून की धारा 24 के तहत खुलासे से छूट का उल्लेख किया, विदेश मंत्रालय ने उसकी अर्जी गृह मंत्रालय को भेजते हुए कहा कि मामला आव्रजन ब्यूरो से उसके अधिकार क्षेत्र के तहत जुड़ा हुआ है।
आव्रजन ब्यूरो गुप्तचर ब्यूरो की एक इकाई है जिसे आरटीआई कानून के पारदर्शी प्रावधानों से छूट प्राप्त है जबतक कि आवेदनकर्ता भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों से जुड़ी कोई सूचना नहीं मांगता। दुर्वे ने कहा, ‘मैंने वित्त मंत्रालय से साल 2014 और 2019 में बैंक ऋण चूककर्ता भगोड़ों की संख्या मांगी थी लेकिन मंत्रालय की ओर से मुझे कोई सूचना नहीं दी गई।’