आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने गत वर्ष सीबीआई के अपने राज्य में प्रवेश पर रोक लगाई थी।उनका कहना था कि सीबीआई एक स्वतंत्र जांच एजेंसी नहीं है। इसे जो ऊपर से कहा जाता है, यह करती है। इसका राजनीतिक तौर पर दुरुपयोग हो रहा है।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने भी इस एजेंसी के कामकाज पर सवाल उठाए थे।
सीबीआई के जरिए केंद्र सरकार विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों के साथ अपनी राजनीतिक खुन्नस निकालती है। यही वजह रही कि उन्होंने अपने राज्य में भी सीबीआई को दी गई सामान्य रजामंदी वापस ले ली थी। शुक्रवार को अखिलेश यादव ने कहा, बड़ा सवाल यह है कि सीबीआई में जो कुछ चल रहा है कि उसकी जांच कौन करेगा।यह जांच एजेंसी केंद्र सरकार का खिलौना बन कर गई है। जो कोई पार्टी या राज्य सरकार, भाजपा की बात नहीं मानते तो उनके पीछे सीबीआई को लगा दिया जाता है।
कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी का कहना था कि सीबीआई जब स्वतंत्र नहीं है तो फिर राज्य इसे अपने यहां क्यों आने देंगे। अभी तीन राज्यों ने सीबीआई को दी सामान्य रजामंदी वापस ली है। अगर यही हालात रहे तो आगे कई अन्य राज्य भी ऐसा कदम उठा सकते हैं। यह गलत भी नहीं है। जब राज्यों को लगे कि जांच एजेंसी निष्पक्ष तरीके से काम कर रही है, तो सभी राज्य उसका सम्मान करेंगे।