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त्रिपुरा : पत्रकारों की हत्या मामले में सीबीआई ने आईपीएफटी के 3 नेताओं के खिलाफ दर्ज की एफआईआर

Mon, 02 Jul 2018 10:58 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला
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सीबीआई (फाइल फोटो)
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त्रिपुरा में दो पत्रकारों की हत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इंडीजीनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) पार्टी के तीन नेताओं और पार्टी के करीब 300-500 कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है। स्थानीय टेलीविजन के लिए काम करने वाले शांतनु भौमिक की पिछले साल 21 सितंबर को उस समय हत्या कर दी गई थी जब वह पश्चिमी त्रिपुरा जिले के मंडवई इलाके में सड़क नाकाबंदी आंदोलन की रिपोर्टिंग करने गए थे।
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वहीं, क्षेत्रीय भाषा के अपराधिक मामलों के पत्रकार सुदीप दत्ता की हत्या इसी जिले में पिछले साल 20 नवंबर को आर के नगर स्थित ‘त्रिपुरा स्टेट राइफल्स’ (टीएसआर) 2 बटालियन के मुख्यालय में कर दी गई थी।  

हाल ही में इन दोनों हत्याओं की सीबीआई जांच की मंजूरी दी गई थी। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने जानकारी देते हुए बताया था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) राज्य में दो पत्रकारों की हत्या के मामले की जांच को राजी हो गया है। उन्होंने कहा था कि सीबीआई दोनों मामलों की जांच करेगी। 
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उन्होंने कहा था कि भाजपा-आईपीएफटी सरकार ने घोषणापत्र में किए अपने एक और वादे को भी पूरा कर दिया है। सीबीआई अधिकारी मामलों की जांच कर दोनों परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा था कि सरकार ने सकारात्मक कदम उठाया है ताकि त्रिपुरा में सरकार स्वतंत्रता से काम कर सके। 
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पार्टी के कई कार्यकर्ताओं पर भी एफआईआर दर्ज

सीबीआई ने जिन तीन नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है, उनमें बलराम देव बर्मा और धीरेंद्र देब बर्मा भाजपा सरकार की सहयोगी पार्टी इंडीजीनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) पार्टी के नेता हैं। जबकि एक अन्य अमित देब बर्मा पार्टी के मंडवई डिविजनल कमेटी के अध्यक्ष हैं। इसके अलावा पार्टी के 300-500 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी इन दोनों मामलों में केस दर्ज किया गया है। 

त्रिपुरा उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अतिरिक्त जिला तथा सत्र न्यायालय ने सुदीप दत्ता हत्या मामले की जांच रोक दी थी। राज्य पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने हत्या की जांच कर आरोप पत्र दायर किया था। इसने ही शांतनु भौमिक मामले की भी जांच की है लेकिन अब तक आरोप पत्र दायर नहीं किया गया है। 

पत्रकार शांतनु भौमिक के पिता साधन भौमिक पुलिस की जांच से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने हाईकोर्ट से मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। तब तत्कालीन सीपीएम नीत लेफ्ट फ्रंट सरकार ने इसका विरोध किया था। मौजूदा बीजेपी सरकार ने मई में अदालत को सूचित किया था कि उसने मामले की जांच को सीबीआई के सुपुर्द कर दिया है।  
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