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कार्ति चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, विदेश जाने पर लगी रोक

Mon, 14 Aug 2017 03:16 PM IST
amarujala.com- presented by: मनीष कुमार
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- फोटो : reuters
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मद्रास हाईकोर्ट की ओर से पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को मिली राहत ज्यादा दिनों तक टिकी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से उस लुक आउट नोटिस को बरकार रखा गया है जिसपर मद्रास हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया था। इस फैसले के बाद कार्ति के विदेश जाने पर रोक लग गई है।
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दरअसल, कार्ति पर ईडी और सीबीआई की जांच पूरी होने तक उनके देश छोड़ने पर रोक लगा दी गई थी। कार्ति ने इसके खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसपर मद्रास हाईकोर्ट ने स्टे ऑर्डर जारी कर दिया। साथ ही केंद्र से 4 सितंबर से काउंटर एफिडेविट भी फाइल करने को कहा है। 

उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई द्वारा दायर कथित भ्रष्टाचार मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम और अन्य के खिलाफ लुकआउट नोटिस पर रोक लगाने के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ केंद्र की याचिका पर सुनवाई करने पर आज सहमति जताई।
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प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि वह सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई पूरी होने के बाद आज स्वयं मामले की सुनवाई करेगी। केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की मांग की।

मद्रास उच्च न्यायालय ने सीबीआई द्वारा दायर भ्रष्टाचार मामले में केंद्र द्वारा कार्ति चिदंबरम एवं चार अन्य के खिलाफ जारी ‘लुकआउट सर्कुलर’ पर 10 अगस्त को रोक लगा दी थी और कहा था कि ये सर्कुलर प्रथम दृष्टया ‘‘अवांछित’’ हैं।

कार्ति के अलावा उनके सहयोगी सी बी एन रेड्डी, रवि विश्वनाथ, मोहनन राजेश और एस भास्कर रमण को भी अंतरिम राहत मिली है। अदालत ने कहा था कि पूछताछ के लिए 29 जून को पेश होने के लिए कार्ति को सीआरपीसी की प्रासंगिक धाराओं के तहत नोटिस भेजे जाने के मात्र एक दिन बाद यह सर्कुलर जारी किया गया।

‘‘यह... अदालत के अनुसार प्रथमदृष्टया अवांछित है।’’ गृह मंत्रालय के तहत आव्रजन ब्यूरो एवं विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) ने पिछली 16 जून को कार्ति और 18 जुलाई को चार अन्य के खिलाफ सर्कुलर जारी किए थे।

यह मामला वर्ष 2007 में विदेशों से फंड हासिल करने के लिए आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी दिलाने में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। उस समय पी चिदंबरम केंद्रीय वित्त मंत्री थे।
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