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Cauvery Water Row: जल विवाद सुलझाने के लिए कर्नाटक में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक; बोम्मई ने सरकार पर साधा निशाना

Sun, 20 Aug 2023 07:39 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु

सार

Cauvery Water Row: कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार ने कावेरी से संबंधित जल विवादों पर 23 अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार - फोटो : ट्विटर/सिद्धारमैया
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विस्तार
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कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार ने कावेरी से संबंधित जल विवादों पर 23 अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने लंबे समय से लंबित इस मुद्दे के समाधान तक पहुंचने के लिए कुछ वरिष्ठ सांसदों को भी बैठक का हिस्सा बनने के लिए बुलाया है। 

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उन्होंने कहा, 'कर्नाटक सरकार कावेरी से जुड़े जल विवादों पर सर्वदलीय बैठक बुला रही है। यह बैठक बुधवार (23 अगस्त) को है। मैंने कुछ वरिष्ठ संसद सदस्यों को बैठक का हिस्सा बनने के लिए बुलाया है। मैंने समाधान खोजने के लिए हमने यह बैठक बुलाई है।'

शिवकुमार ने गुरुवार को कहा था कि वे कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) से तमिलनाडु के साथ पानी साझा करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करेंगे। सीडब्ल्यूएमए ने कर्नाटक सरकार को अगले 15 दिनों में तमिलनाडु के लिए 10,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है,राज्य पानी की कमी से जूझ रहा है। 
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शिवकुमार ने कहा,'हमें एक निर्देश मिला है कि हमें 15 दिनों के लिए (कावेरी से) 10,000 क्यूसेक पानी छोड़ना है। हम जानते हैं कि राज्य वर्तमान में जल संकट से जूझ रहा है। हम कुछ क्षेत्रों में गंभीर सूखे का सामना कर रहे हैं।' 

उन्होंने कहा, 'फिर भी, उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में हमने पिछले चार-पांच दिनों में (कावेरी से) पानी छोड़ा है। हालांकि, हम प्राधिकरण से इस फैसले (पानी छोड़ने के) पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हैं क्योंकि इसका कर्नाटक में पीने योग्य पानी की उपलब्धता पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।'

इस बीच, इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस सरकार ने राज्य में किसानों को धोखा दिया है क्योंकि उसने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के समक्ष उनकी दुर्दशा नहीं रखी। उन्होंने कहा,'कांग्रेस सरकार ने किसानों को धोखा दिया है, खासकर कावेरी नदी बेसिन में रहने वाले किसानों को। उन्होंने सीडब्ल्यूएमए के समक्ष अपना मामला नहीं लड़ा। अब उन्हें उच्चतम न्यायालय के समक्ष हमारे किसानों के लिए खड़ा होना चाहिए और प्राधिकरण के समक्ष आत्मसमर्पण करने और (तमिलनाडु को) पानी देने के बजाय गुण-दोष के आधार पर हमारे मामले पर बहस करनी चाहिए। यह हमारे किसानों के साथ धोखा है।'
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