काटने के लिए पशु बाजारों में गोवंश एवं अन्य मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर रोक संबंधी अधिसूचना पर केंद्र सरकार ने यूटर्न लेने का संकेत दिया है। सरकार ने ऐसा इस अधिसूचना का देशभर में हो रहे विरोध के मद्देनजर किया है। सरकार ने साफ किया है कि यह सरकार की प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है और वह इस मुद्दे पर मिले सुझावों पर विचार करने को तैयार है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने रविवार को कहा कि इस अधिसूचना के पीछे मंशा किसी खास समूह को नुकसान पहुंचाना, लोगों की खाने की आदत को प्रभावित करना या बूचड़खानों के कारोबार को प्रभावित करना नहीं है। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम से इतर मंत्री ने कहा, ‘हमारे पास जो सुझाव आए हैं उनकी समीक्षा की जाएगी। यह सरकार के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं है।’ मंत्री से पूछा गया था कि क्या इन सुझावों की समीक्षा की जा रही है और क्या सरकार इस मुद्दे पर वैकल्पिक विचारों पर भी ध्यान देगी।
गौरतलब है कि विवाद के बीच बीते बृहस्पतिवार को जर्मनी से लौटते ही हषर्वधन ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के शीर्ष अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक की थी। इसमें अधिसूचना की भाषा में बदलाव लाने और इसके दायरे से भैंस-भैंसा और ऊंट जैसे पशुओं को बाहर करने पर लगभग सहमति बन गई थी। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार अधिसूचना के कुछ प्रावधानों और भाषा में बदलाव की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। गोवंश (गाय, बैल, बछड़ा) के अलावा अन्य पशुओं को इसके दायरे से बाहर किया जाएगा। इस संबंध में अगले हफ्ते व्यापक विचार-विमर्श के बाद बदलाव की घोषणा की जाएगी।
क्यों चिंतित है सरकार
- दरअसल इस अधिसूचना का जोरदार विरोध उन्हीं राज्यों में हो रहा है, जहां भाजपा अपने संगठन के विस्तार की व्यापक संभावना देख रही है। अधिसूचना का केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भारी विरोध हो रहा है, जबिक भाजपा इन राज्यों में जनाधार बढ़ाने को दिन रात एक किए हुए है। अधिसूचना का गोवा में भी विरोध हो रहा है, जहां भाजपा बमुश्किल सत्ता बरकरार रख पाई है।