सोमवार को आरएमएल में फोर्डा के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के सीईओ डॉ. इंदुभूषण ने बताया कि 23 सिंतबर को झारखंड के रांची से पूरे देश में लागू हुई इस योजना से एक माह के भीतर एक लाख मरीजों को अस्पतालों में उपचार मिला है। स्टेंट से लेकर बायपास सर्जरी, प्रसूति से लेकर न्यूरो और बाल रोग तक का उपचार मरीजों को मिला है।
उन्होंने बताया कि 50 करोड़ लोगों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा देने वाली इस योजना के तहत फर्जीवाड़े को लेकर सवाल उठते हैं। चूंकि सरकार के समक्ष ये गंभीर विषय है। इसलिए मेडिकल ऑडिट के जरिए इस तरह की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी। इस ऑडिट में लाभार्थी से लेकर अस्पताल तक सभी शामिल होंगे।
एक सवाल के जवाब में डॉ. इंदुभूषण ने ये भी बताया कि एम्स, सफदरजंग और आरएमएल जैसे अस्पतालों में सभी विभागों के डॉक्टरों को आयुष्मान भारत के पैकेज की जानकारी दी जाएगी। ताकि मरीज के पहुंचने पर डॉक्टर को किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो।
सूत्रों की मानें तो कुछ शिकायतें ऐसे देखने को मिल रही हैं जब एक मरीज को एक से ज्यादा पैकेज के तहत उपचार किया जाना है। ऐसे में डॉक्टर के आगे भी मुश्किल है। इस पर डॉ. इंदुभूषण का कहना है कि एक से ज्यादा पैकेज होने की स्थिति में भी फिलहाल मरीजों से किसी भी तरह का खर्चा नहीं लिया जा रहा।
अक्सर अस्पतालों में दवाएं या जांच सुविधा उपलब्ध न होने के चलते मरीज को बाहरी दुकान या केंद्र पर भेजे जाने के मामले देखने को मिलते हैं। इसे लेकर आयुष्मान भारत में प्रावधान किया है कि अगर कोई मरीज अस्पताल में इलाज के लिए जाता है वहां दवा या अन्य जरूरी जांच नहीं है तो इसका खर्च अस्पताल को ही देना होगा। बाद में क्लेम के साथ उसे वह राशि मिल जाएगी।