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Cash Crunch से निपटने के लिए तीन शिफ्ट में होगी नोटों की छपाई, 10 राज्यों तक पहुंचा करेंसी का अकाल

Wed, 18 Apr 2018 01:41 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सरकार पैसे को लेकर सफाई पर सफाई दे रही है लेकिन देश के करीब 10 राज्यों में पैसों का अकाल पड़ गया है। लोग एक एटीएम से दूसरे एटीएम के चक्कर लगा रहे हैं। एटीएम में पड़े सूखे ने एकबार फिर  से नोटबंदी की याद ताजा कर दी है। जगह जगह एटीएम टर्मिनल में कैश न होने की सूचना के साथ बोर्ड टांग दिए गए हैं। पैसे के सूखे की चपेट में आए देश के 10 राज्यों में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, दिल्ली, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं। जबकि देश की राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों से भी लोग Cash Crunch की शिकायत कर रहे हैं। 
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इस पर वित्त मंत्रालय, वित्त मंत्री और वित्त राज्यमंत्री ने भी सफाई दी है और कहा है कि अचानक नकदी की बढ़ी मांग की वजह से यह क्रंच सामने आई है। यही नहीं मंत्रालय ने कहा कि अप्रैल के शुरुआती 13 दिनों में सामान्य से पांच गुना ज्यादा करंसी निकाली गई। सरकार  का कहना है कि दो से तीन दिन में हालात सुधर जाएंगे। वहीं हालात सुधरने तक सरकार ने गुहार लगाई है कि कैशलेस लेन-देन करें। 
 

विपक्ष ने पैसे की इस कमी पर जहां नोटबंदी से जोड़ कर सरकार को घेरा है वहीं सरकार पूरे मामले पर पांच स्तरों पर सफाई देती रही। वित्त मंत्री ने ट्वीट कर कहा कि सरकार के पास पैसे की दिक्कत नहीं है। वित्त राज्य मंत्री और आर्थिक मामलों के सचिव ने मीडिया से बात की। वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक की ओर से बयान जारी किए गए।आरबीआई ने कहा कि इस क्रंच से निपटने के लिए कमेटी बनाई गई है। इसमें दो से तीन दिन लग सकते हैं। 

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2000 के नोट की छपाई बंद होना और शादी का सीजन बड़ी वजह 

CURRENCY
एटीएम से अप्रैल में अब तक निकलने चाहिए थे 8.45 हजार करोड़ रु लेकिन निकाले गए 45 हजार करोड़ जबकि 2 हजार के नोट बाजार से पूरी तरह से नदारद हो गए हैं। देश में हर महीने में 19 से 20 हजार करोड़ रु. नकदी की मांग रहती है। जबकि यह मांग जनवरी में दोगुनी हो गई वहीं मार्च तक हर माह 40 से 45 हजार करोड़ रु. सप्लाई किए गए। इससे खजाना कम होता गया। मंत्रालय ने बताया कि 3 लाख करोड़ के बदले अभी 1.75 लाख करोड़ का स्टॉक है। अप्रैल में शुरू के 13 दिन में 45 हजार करोड़ रु. की डिमांड रही। यानी रोज 3,461 करोड़ रु. निकले। 

भारी किरकिरी झेल रही आरबीआई ने बयान जारी कर कहा कि उसके पास पर्याप्त नकदी है। लॉजिस्टिक कारणों से कुछ राज्यों में एटीएम में नकदी भरने  में दिक्कतें हैं। फिर भी सभी चार नोट प्रेसों में छपाई तेज कर दी गई है।
 
अचानक आए क्रंच को जमाखोरी से जोड़ कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि दो हजार के नोटों की जमाखोरी हो रही है। इससे निपटने के लिए 500 के नोटों की छपाई 5 गुना बढ़ाई जाएगी। आरबीआई का कहना है कि फिलहाल 18 लाख करोड़ की नकदी चलन में है। इनमें 6.7 लाख करोड़ रु. 2000 के नोट हैं। लोगों से ये नोट वापस नहीं आ रहे। इनकी छपाई भी बंद है। 2000 के नोट एटीएम में डालने पर एकबार में 60 लाख रु. तक आते हैं। पर छोटी करंसी 15 से 20 लाख रुपए तक ही आती है। सिर्फ 30% एटीएम 200 के नोटों के लिए कैलिब्रेटेड हैं। और इस बीच शादी का सीजन जारी है। 

नोटबंदी के बाद देवास में दूसरी बार लिया गया तीसरी शिफ्ट शुरू करने का फैसला 
18 अप्रैल यानी आज से सरकार ने देवास के बैंक नोट प्रेस में 24 घंटे मशीनें चलाने का फैसला लिया है। इसके लिए 9 घंटे की तीसरी शिफ्ट भी शुरू कर दी गई है। नोटबंदी के बाद दूसरा मौका है जब 24 घंटे यहां मशीनें चलेंगी और नोट छापे जाएंगे। जनवरी में चोरी कांड के बाद उत्पादन 50 लाख नोट प्रतिदिन रह गया है। नोटबंदी के बाद यह 150 लाख तक गया था। तीसरी शिफ्ट शुरू होने से 10 लाख तक पहुंच सकता है। 
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