एटीएम से अप्रैल में अब तक निकलने चाहिए थे 8.45 हजार करोड़ रु लेकिन निकाले गए 45 हजार करोड़ जबकि 2 हजार के नोट बाजार से पूरी तरह से नदारद हो गए हैं। देश में हर महीने में 19 से 20 हजार करोड़ रु. नकदी की मांग रहती है। जबकि यह मांग जनवरी में दोगुनी हो गई वहीं मार्च तक हर माह 40 से 45 हजार करोड़ रु. सप्लाई किए गए। इससे खजाना कम होता गया। मंत्रालय ने बताया कि 3 लाख करोड़ के बदले अभी 1.75 लाख करोड़ का स्टॉक है। अप्रैल में शुरू के 13 दिन में 45 हजार करोड़ रु. की डिमांड रही। यानी रोज 3,461 करोड़ रु. निकले।
भारी किरकिरी झेल रही आरबीआई ने बयान जारी कर कहा कि उसके पास पर्याप्त नकदी है। लॉजिस्टिक कारणों से कुछ राज्यों में एटीएम में नकदी भरने में दिक्कतें हैं। फिर भी सभी चार नोट प्रेसों में छपाई तेज कर दी गई है।
अचानक आए क्रंच को जमाखोरी से जोड़ कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि दो हजार के नोटों की जमाखोरी हो रही है। इससे निपटने के लिए 500 के नोटों की छपाई 5 गुना बढ़ाई जाएगी। आरबीआई का कहना है कि फिलहाल 18 लाख करोड़ की नकदी चलन में है। इनमें 6.7 लाख करोड़ रु. 2000 के नोट हैं। लोगों से ये नोट वापस नहीं आ रहे। इनकी छपाई भी बंद है। 2000 के नोट एटीएम में डालने पर एकबार में 60 लाख रु. तक आते हैं। पर छोटी करंसी 15 से 20 लाख रुपए तक ही आती है। सिर्फ 30% एटीएम 200 के नोटों के लिए कैलिब्रेटेड हैं। और इस बीच शादी का सीजन जारी है।
नोटबंदी के बाद देवास में दूसरी बार लिया गया तीसरी शिफ्ट शुरू करने का फैसला
18 अप्रैल यानी आज से सरकार ने देवास के बैंक नोट प्रेस में 24 घंटे मशीनें चलाने का फैसला लिया है। इसके लिए 9 घंटे की तीसरी शिफ्ट भी शुरू कर दी गई है। नोटबंदी के बाद दूसरा मौका है जब 24 घंटे यहां मशीनें चलेंगी और नोट छापे जाएंगे। जनवरी में चोरी कांड के बाद उत्पादन 50 लाख नोट प्रतिदिन रह गया है। नोटबंदी के बाद यह 150 लाख तक गया था। तीसरी शिफ्ट शुरू होने से 10 लाख तक पहुंच सकता है।