बृहन्मुंबई नगरपालिका के आंकड़ों के मुताबिक शहर में पिछले पांच साल की तुलना में इस साल शुरुआती पांच महीनों में डेंगू, मलेरिया और लेप्टोस्पायरोसिस के मामलों में 54 फीसदी की गिरावट आई है। मामलों में गिरावट के पीछे का कारण कोरोना वायरस काबू करने के लिए लगाया गया लॉकडाउन बताया जा रहा है।
मुंबई में पिछले पांच साल की तुलना में साल 2020 के मई तक मच्छरों से होने वाली बीमारी और वेक्टर बोर्न बीमारी के मामलों में कमी आई है। हालांकि यह माना जा रहा है कि लॉकडाउन की वजह से बीएमसी की नियंत्रण मापक प्रणाली भी प्रभावित हुई है और यह चिंता की बात है।
आंकड़ों के मुताबिक साल 2016 में जनवरी-मई तक मुंबई में केवल पानी और मच्छरों से संबंधित 1,762 मामले दर्ज किए गए लेकिन इस साल जनवरी-मई तक ये मामले 54 फीसदी गिरकर 809 रह गए। साल 2016 के शुरुआती पांच महीनों में डेंगू के 114 मामले थे जो इस साल के शुरुआती पांच महीनों में गिरकर केवल 37 रह गए। वहीं मच्छरों से होने वाली बीमारी में 74 फीसदी तक गिरावट आई है। साल 2016 में मुंबई में मलेरिया के 1,628 मामले आए थे जो इस साल गिरकर 753 रह गए।
मुंबई में 2016 की तुलना में इस साल लेप्टोस्पायरोसिस के 19 मामले ही देखने को मिले जबकि 2016 में ये मामले 20 थे। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य में रुकावट आने की वजह से मलेरिया और वेक्टर-बोर्न जैसी बीमारियों में कमी देखी गई है। बीएमसी के अतिरिक्त कमिश्नर सुरेश ककानी ने बताया कि लोगों की आवाजाही में कमी और निर्माण कार्य बंद होने से इन बीमारियों में कमी आई है।
मुंबई में मानसून के दौरान मच्छरों से संबंधित बीमारी ज्यादा होती हैं इसलिए प्रशासन ने कई जगहों पर ऐसे मरीजों के इलाज के लिए नॉन-कोविड-19 अस्पताल तैयार कर दिए हैं। हालांकि मलेरिया, डेंगू और कोविड-19 के लक्षण लगभग एक समान है, इसलिए मरीज को लेकर स्वास्थ्य महकमे में संदेह की स्थिति भी बनी रह सकती है।
हिंदूजा अस्पताल के डॉक्टर लांसलोट पिंटो का कहना है कि स्वाब टेस्ट से पहले हम मरीज में डेंगू, मलेरिया के असामान्य लक्षणों की पहचान कर सकते हैं, जैसे खुशबू ना आना, अंगुलियों और पैर के अंगूठों का रंग बदलना, फेफड़ों की स्थिति देखने के लिए एक्स-रे कर पता लगाया जा सकता है कि मरीज को क्या बीमारी है।
मगर इससे पहले डॉक्टर को कई ऐसे मरीज मिले जो कोविड-19 और डेंगू दोनों बीमारियों से ग्रसित थे। महाराष्ट्र के टास्क फोर्स के सदस्य डॉ ओम श्रीवास्तव का कहना है कि ऐसे कुछ मामले सामने आए हैं, जिसमें मरीज में कोविड-19 और डेंगू दोनों के लक्षण भी दिखाई दिए। ऐसे मामलों में स्वास्थ्य महकमे में और परेशानियां बढ़ जाती हैं।