ये तकनीक उन रोगियों के लिए है जिनमें महाधमनी वाल्व को बदलना जरूरी होता है। अक्सर ज्यादा जोखिम भरे मामले जैसे 60 वर्ष से अधिक आयु, एनीस्थिसिया नहीं दे सकते या गंभीर अवस्था, फेफड़े से जुड़ा रोग आदि में बेहतर इस्तेमाल हो सकता है। एंजियोप्लास्टि की भांति जांघ की नस के जरिए कैथेटर डालते हैं और डॉक्टर पुराने महाधमनी वाल्व में नया कृत्रिम वाल्व डाल देते हैं। इसके बाद कैथेटर को हटाकर पंचर साइट को बंद कर देते हैं और ड्रेसिंग के साथ कवर कर देते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के कार्डियो प्रमुख डॉ. विवेका कुमार बताते हैं कि धीरे-धीरे ही सही, लेकिन कार्डियोलॉजी में नए-नए ट्रेंड आ रहे हैं। सर्जरी को लेकर अक्सर मरीज और उसका पूरा परिवार गंभीर सोच में पड़ जाता है, जबकि अब मेडिकल में इसके बेहतर विकल्प आ चुके हैं।
दिल्ली एम्स के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राकेश यादव बताते हैं, एक वक्त था जब दिल में धमनियों का ब्लॉकेज होने पर मरीज के पास बायपास सर्जरी या स्टेंट डालने का विकल्प होता था, जबकि दिल से जुड़े अन्य विकार में ऑपरेशन ही जरूरी होता था। खासतौर पर जन्मजात विकारों में, लेकिन अब ट्रेंड बदल रहा है।
बीते महीने 68 वर्षीय मरीज राजबीर का सफदरजंग अस्पताल में टीएवीआर तकनीक से उपचार हुआ। अस्पताल की डॉ. प्रीति गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार के अस्पतालों में ये पहली बार सफदरजंग अस्पताल में हुआ है। डॉ. संदीप बंसल की निगरानी में करीब 3 घंटे ये प्रक्रिया चली थी।
फैक्ट्स
- 30 फीसदी मरीज ओपन हार्ट सजरी के लिए नहीं होते फिट।
- जर्मनी में टीएवीआर तकनीक से होते हैं 70 प्रतिशत ऑपरेशन।
- देश के चुनिंदा अस्पतालों में ही टीएवीआर तकनीक से हो रहा उपचार।
- विशेषज्ञों के अनुसार, लोगों में जागरूकता के साथ डॉक्टरों को भी प्रशिक्षण की दरकार।
- विशेषज्ञों की मांग, सरकार मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मिलना चाहिए बढ़ावा।