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कैप्टन अजय शनिवार को थाम सकते हैं भाजपा का दामन

Sat, 30 Jul 2016 01:54 AM IST
शादाब रिजवी/ नई दिल्ली
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कैप्टन अजय यादव - फोटो : amar ujala
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हरियाणा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव ने कांग्रेस से तद्गस सील पुराना नाता  एक झटके में यूं ही नहीं तोड़ डाला। दरअसल, प्रदेश केकांग्रेस प्रभारी महासचिव कमलनाथ की तरफ से उनकी अनदेखी करने से वे बेहद आहत थे।
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कमलनाथ के प्रभारी बनते ही यादव ने भाजपा नेता और सीएम मनोहर लाल खट्टर और दिल्ली में की बड़े नेताओं से एक माह पहले मुलाकात कर पार्टी  को अलविदा कहने के साफ संकेत दे दिए थे।

पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को पार्टी  में मिल रही ज्यादा तवज्जों से भी वह परेशान थे। अजय यादव के जनाधार का पता इससे ही चलता है कि वह सूबे से छह बार विधायक रह चुकेहै। शुरू से कांग्रेसी रहे हैं। पार्टी में उनकी पूर्व सीएम भूपेंड्र सिंह हुड्डा से कभी नही बनी।
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इनके हुड्डा से रिश्ते कितने तलख थे, उनकेइस कथन से ही पता चलता है कि  मेरे पिता सच्चे कांग्रेसी थे और मैं भी नेहरू गांधी परिवार में महान आस्था रखता हूं। लेकिन  पार्टी में भूपेंद्र सिंह हुड्डा सुप्रीम है और बाकी तुच्छ हैं। दरअसल वह हुड्डा के सामने खुद को कई बार सीएम का दावेदार पेश कर चुके हैं। 

अब हरियाणा का कमलनाथ को जैसे ही प्रभारी बनाया गया अजय यादव को लगने लगा कि उनके विरोधी अब हावी होंगे। राज्यसभा में 14 विधायकों के वोट रद्द होने के मुद्दे पर हुड्डा खेमे के खिलाफ हाईकमान केकार्रवाई नहीं करने से भी वह आहत थे। उनका मानना था कि पूर्व सीएम के इशारे पर ही वोट रद्द किए गए हैं। पार्टी  में  उनके खिलाफ आवाज उठने लगी थी।  
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कैप्टन के अगले ठिकाने का आज खुलासा संभव

कैप्टन अजय यादव - फोटो : amar ujala
हरियाणा में एक कार्यक्र्म में मंच पर ही एक महिला कांग्रेस नेता से कैप्टन की नोकझोंक भी चर्चा का विषय बनी थी। कैप्टन को ज्यादा परेशानी दिल्ली में कमलनाथ की तरफ से 27 जुलाई को प्रदेश में गुटबंदी खत्म करने के नाम पर बुलाई गई बैठक में निमंत्रण नहीं देने से हुई।  

चर्चा तो यहां तक है कि अजय यादव का नाम बैठक में आने वाले नेताओं में शामिल था, लेनिक आखरी वक्त में उसको काट दिया गया। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अजय यादव काफी दिन से पार्टी  विरोधी कार्य कर रहे थे। 

कैप्टन के अगले ठिकाने का आज खुलासा संभव चर्चा है कि कैप्टन हरियाणा समेत दिल्ली के कई भाजपा नेताओं के संपर्क में है।  बताया यह भी जा रहा है कि कुछ कांग्रेसी भी उनको मनाने की कोशिश में है, लेकिन उनकेमानने की उम्मीद कम है।  

हालांकि वह फिलहाल हरियाणा से बाहर हैं। भाजपा में  शामिल होने की अगर बात नहीं बनती है तब वह अपना अलग दल भी बना सकते हैं। बताया जा रहा है कि इसका खुलासा वह शनिवार प्रेस कांफ्रेस बुलाकर कर सकते हैं। वैसे भाजपा का दामन थामने की उम्मीद बेहद ज्यादा है। 
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