हरियाणा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव ने कांग्रेस से तद्गस सील पुराना नाता एक झटके में यूं ही नहीं तोड़ डाला। दरअसल, प्रदेश केकांग्रेस प्रभारी महासचिव कमलनाथ की तरफ से उनकी अनदेखी करने से वे बेहद आहत थे।
कमलनाथ के प्रभारी बनते ही यादव ने भाजपा नेता और सीएम मनोहर लाल खट्टर और दिल्ली में की बड़े नेताओं से एक माह पहले मुलाकात कर पार्टी को अलविदा कहने के साफ संकेत दे दिए थे।
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को पार्टी में मिल रही ज्यादा तवज्जों से भी वह परेशान थे। अजय यादव के जनाधार का पता इससे ही चलता है कि वह सूबे से छह बार विधायक रह चुकेहै। शुरू से कांग्रेसी रहे हैं। पार्टी में उनकी पूर्व सीएम भूपेंड्र सिंह हुड्डा से कभी नही बनी।
इनके हुड्डा से रिश्ते कितने तलख थे, उनकेइस कथन से ही पता चलता है कि मेरे पिता सच्चे कांग्रेसी थे और मैं भी नेहरू गांधी परिवार में महान आस्था रखता हूं। लेकिन पार्टी में भूपेंद्र सिंह हुड्डा सुप्रीम है और बाकी तुच्छ हैं। दरअसल वह हुड्डा के सामने खुद को कई बार सीएम का दावेदार पेश कर चुके हैं।
अब हरियाणा का कमलनाथ को जैसे ही प्रभारी बनाया गया अजय यादव को लगने लगा कि उनके विरोधी अब हावी होंगे। राज्यसभा में 14 विधायकों के वोट रद्द होने के मुद्दे पर हुड्डा खेमे के खिलाफ हाईकमान केकार्रवाई नहीं करने से भी वह आहत थे। उनका मानना था कि पूर्व सीएम के इशारे पर ही वोट रद्द किए गए हैं। पार्टी में उनके खिलाफ आवाज उठने लगी थी।