दिल्ली हाईकोर्ट ने महेश सिंह व अन्य बनाम भारत सरकार मामले में रिट पेटिशन नंबर 9604/2020 के तहत आदेश दिया था। पेटिशनर ने अदालत के समक्ष प्रार्थना की थी, कि आईटीबीपी और सीआरपीएफ में एसआई फार्मासिस्ट को उनकी ज्वाइनिंग पर जो वेतनमान मिलता है, वही बीएसएफ के एसआई फार्मासिस्ट को दिया जाए। नियुक्ति तिथि से ग्रेड पे 4200 रुपये में 'पे स्केल 5500-175-9000' रुपये देने का आदेश जारी करें। इसके साथ नियमानुसार सभी भत्ते और लाभ भी दिए जाएं। इस केस में जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट के एलपीए एसडब्लू नंबर 228/2002 में दिए गए जजमेंट का हवाला दिया गया है। तीसरा, याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष लगाई अपनी प्रार्थना में सीआरपीएफ पर्सनल की सिविल अपील नंबर 25 ऑफ 2008 को भी शामिल किया है।
इसमें कहा गया है कि उसे वही राहत दी जाए जो सीआरपीएफ पर्सनल को दी गई थी। बीएसएफ में कार्यरत पेटिशनर ने कहा, उसके साथ वेतनमान में समानता का वही भाव रखा जाए, जो उनके समकक्ष बल आईटीबीपी और सीआरपीएफ में एंट्री लेवल पर रखा जाता है। याचिकाकर्ता के वकील अंकुर छिब्बर ने इस केस में जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया है। उसमें अदालत ने कहा था, सीआरपीएफ के एक पर्सनल को उनके समकक्ष बल आईटीबीपी में दिए जाने वाले वेतनमान के अनुरूप 'वेतन में समानता' प्रदान की जाए। इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष 2018 में आए एक प्रपोजल का हवाला दिया गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, यह प्रपोजल 2018 से पेंडिंग है। ऐसे में यह आदेश जारी किया जाता है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय 16 सप्ताह में इस मामले में निर्णय दे। इस मामले में नरेश कुमार व अन्य बनाम भारत सरकार व अन्य, एसडब्लूपी नंबर 186/1998, 19 अप्रैल 2001 को ध्यान रखा जाए।
अब उक्त फैसले में केंद्रीय गृह मंत्रालय की 'पुलिस फाइनेंस-5' ने एक आदेश जारी किया है। इसमें बीएसएफ द्वारा सबमिट 2018 के प्रपोजल का हवाला दिया गया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा 2 दिसंबर को कहा गया है कि वह दिल्ली हाईकोर्ट के महेश सिंह व 6 अन्य बनाम भारत सरकार, मामले में दिए गए फैसले को लागू करने के लिए सहमत है। पूर्व में अदालतों द्वारा आदेशों के मुताबिक, व्यय विभाग याचिकाकर्ताओं को वही फायदे देने के लिए तैयार है, जो दूसरे बलों में मिलते हैं। संबंधित बल द्वारा एकरूपता वाले आदेश जारी किए जाएं।