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सेना की तर्ज पर सीएपीएफ जवानों को नहीं मिला पूर्व सैनिकों का दर्जा, राज्यों ने इसलिए नहीं मानी केंद्र की सलाह

Tue, 08 Sep 2020 06:38 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सात फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव एसके शाही ने राज्यों के मुख्यसचिवों को पत्र भेजकर सीएपीएफ से रिटायर हुए कर्मियों को पूर्व सैनिकों का दर्जा देकर उसके अनुरूप सुविधाएं देने के लिए कहा था...
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सीआरपीएफ - फोटो : ANI (File Photo)
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड कर्मियों को सेना की तर्ज पर 'पूर्व सैनिक' का दर्जा देने के लिए कोई भी राज्य तैयार नहीं है। केंद्र की तरफ से कई बार राज्यों को इस बारे में पत्र भेजा गया है, लेकिन राज्यों ने इस नियम को लागू नहीं किया। खास बात ये है कि केंद्र सरकार ने अभी तक ड्यूटी के दौरान मारे जाने वाले अर्धसैनिक बलों के कर्मियों को शहीद का दर्जा नहीं दिया है। संसद से लेकर दूसरे विभिन्न मंचों के जरिए यह मुद्दा उठाया जा चुका है, मगर कोई फायदा नहीं हुआ।

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इतना ही नहीं, केंद्र सरकार खुद सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी कर्मियों को पूर्व सैनिक वाली सुविधाएं नहीं दे रही है, जबकि इसके लिए राज्यों को पत्र लिखे जा रहे हैं। गत सात फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव एसके शाही ने राज्यों के मुख्यसचिवों को पत्र भेजकर सीएपीएफ से रिटायर हुए कर्मियों को पूर्व सैनिकों का दर्जा देकर उसके अनुरूप सुविधाएं देने के लिए कहा था।

मंत्रालय की ओर से इस बाबत 23 नवंबर 2012 को पहला आधिकारिक ज्ञापन जारी किया गया था। इसमें केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के सेवानिवृत्त कर्मियों को 'एक्स सीएपीएफ पर्सनल' का दर्जा देने की बात कही गई थी। इसके बाद 19 फरवरी 2013, 29 जून 2013 और 23 मार्च 2014 को मंत्रालय की ओर से राज्यों को पत्र भेजकर आग्रह किया गया था कि वे एक्स सीएपीएफ पर्सन को एक्स सर्विसमैन की तर्ज पर मिलने वाले सभी लाभ दें।
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एक्स सीएपीएफ का दर्जा मिलने से रिटायर्ड कर्मियों को समाज में एक अलग पहचान, मान्यता और रुतबा मिल जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जब दो तीन साल के बाद इसकी समीक्षा की, तो पाया गया कि एक भी राज्य ने सेना की तर्ज पर सीएपीएफ कर्मियों को एक्स सर्विसमैन का दर्जा व उसके तहत मिलने वाले लाभ प्रदान नहीं किए हैं। अभी तक किसी भी राज्य ने उक्त पत्र के अनुरुप कदम नहीं उठाया है। इसकी वजह ये रही कि केंद्र ने खुद इन पूर्व कर्मियों को सेना की तर्ज पर मिलने वाले सभी फायदे नहीं दिए हैं।

पूर्व-अर्धसैनिक बल कल्याण संघ संस्था (कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन) के महासचिव रणबीर सिंह इस मामले में कई बार अधिकारियों व नेताओं से मिल कर उन्हें ज्ञापन दे चुके हैं। इनकी मांगों में अर्धसेनिक बलों के बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए सरदार पटेल के नाम पर राज्यों की राजधानियों में अर्धसैनिक स्कूल खोलने एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सीजीएचएस डिस्पेंसरी का विस्तार करना शामिल है। सेना की तर्ज पर अर्ध सैनिक बलों के जवानों को पूर्व सैनिकों का दर्जा देने एवं राज्यों में जिला स्तर पर अर्ध-सैनिक कल्याण बोर्ड की स्थापना करने की मांग की गई है।

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