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CAPF: सीएपीएफ इंस्पेक्टरों की 'सुप्रीम' जीत, पहले SLP रद्द तो अब रिव्यू पिटीशन खारिज, MHA के पाले में गेंद

सार

सुप्रीम कोर्ट ने सीएपीएफ इंस्पेक्टरों के करियर प्रोग्रेशन पर अहम फैसला देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। एसएलपी और रिव्यू याचिका खारिज होने के बाद अब फैसला लागू करना गृह मंत्रालय पर है। विस्तार से पढ़ें रिपोर्ट...
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' के इंस्पेक्टरों के करियर प्रोग्रेशन को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने  आईटीबीपी इंस्पेक्टर सुशील कुमार के मामले में यह फैसला दिया है, लेकिन  अब सभी केंद्रीय सुरक्षा बलों के इंस्पेक्टरों के केस में यही फैसला मान्य होगा। वजह, दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा इस संबंध में जितने भी फैसले दिए जा रहे हैं, उनमें आईटीबीपी इंस्पेक्टर सुशील कुमार के केस का हवाला दिया गया है। यानी इस केस की तर्ज पर जितने भी मामले अदालत के समक्ष आ रहे हैं, उनमें सुशील कुमार के केस में दिए गए फैसले को आधार मानने की बात कही जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय बलों के 48 सौ रुपये के ग्रेड 'पे' में चार साल की सेवा पूरी करने वाले इंस्पेक्टरों को 54 सौ रुपये का ग्रेड पे दिया जाएगा। सर्वोच्च अदालत ने इस केस में पहले केंद्र सरकार की 'एसएलपी' रद्द की थी, अब 'रिव्यू पिटीशन' भी खारिज कर दिया है। यानी अब गेंद 'केंद्रीय गृह मंत्रालय' के पाले में आ गई है।

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सर्वोच्च अदालत में समाप्त हो चुका है यह केस 
सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की बैंच ने पिछले सप्ताह हुई इस केस की सुनवाई में केंद्र सरकार की तरफ से दायर किए गए 'रिव्यू पिटीशन' को खारिज कर दिया है। अब यह मामला, सर्वोच्च अदालत में समाप्त हो चुका है। आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार के केस में भारत सरकार, गत वर्ष 27 अक्तूबर को रिव्यू पिटीशन में चली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने डायरी नंबर 61621/2025, केस संख्या आर.पी (सी) नंबर. 000110/2026 को खारिज कर दिया है। केंद्रीय बलों के इंस्पेक्टरों का कहना है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जीत मिल चुकी है। अब सरकार के पास कोई विकल्प नहीं बचा है। इसके बावजूद सरकार, उन्हें तय वित्तीय फायदा नहीं दे रही। केंद्रीय बलों के महानिदेशालय, इस केस में अब मनमर्जी के तर्क दे रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा आईटीबीपी, बीएसएफ और सीआरपीएफ इंस्पेक्टरों के पक्ष में फैसला सुनाया जा चुका है। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ही इस संबंध में विभिन्न बलों के महानिदेशालयों को कोई सकारात्मक आदेश जारी करने के लिए कह सकता है।
 
2008 में जारी हुआ था वह 'कार्यालय ज्ञापन' 
बता दें कि वित्त मंत्रालय के 2008 में जारी एक कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' में कहा गया था कि जिन कर्मियों का 48 सौ रुपये का ग्रेड 'पे' है और वे उसमें चार साल की सेवा पूरी कर चुके हैं तो उनका ग्रेड 'पे' 54 सौ रुपये हो जाएगा। यह बात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में स्वत: ही लागू नहीं होती। इसे लागू कराने के लिए अदालतों का सहारा लेना पड़ता है। दो वर्ष पहले आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने दिल्ली कोर्ट से यह लड़ाई जीती थी, इसके बाद बीएसएफ के लगभग सवा सौ इंस्पेक्टरों ने अदालत से अपने हक में आदेश जारी कराया। दिल्ली हाईकोर्ट ने इन इंस्पेक्टरों को 54 सौ रुपये वाला 'ग्रेड पे' देने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ, सरकार सुप्रीम कोर्ट में चली गई। वहां पर एसएलपी खारिज हो गई, मगर इसके बाद भी इंस्पेक्टरों को न्याय नहीं मिल सका। गत वर्ष आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार के मामले में केंद्र सरकार, एसएलपी में चली गई थी। वह याचिका डिसमिस हो गई। उसके बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 'रिव्यू पिटीशन' डाला तो वह भी खारिज हो गया। आईटीबीपी ने सुशील कुमार को 54 सौ रुपये का वित्तीय फायदा दिया था, लेकिन यह शर्त लगा दी थी कि ये सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा। अगर सर्वोच्च अदालत ने सुशील कुमार के खिलाफ फैसला दिया तो 54 सौ का ग्रेड पे, यह फायदा वापस हो जाएगा।  
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सितंबर 2024 में सुनाया फैसला 
आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार को इस केस में यूं ही जीत नहीं मिली थी। दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस रेखा पल्ली और जस्टिस शैलेंद्र कौर ने आईटीबीपी निरीक्षक के मामले में सितंबर 2024 को फैसला सुनाया था। अदालत की सुनवाई में बताया गया कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 29 अगस्त 2008 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था। इसमें कहा गया था कि जिन कर्मियों का 48 सौ ग्रेड पे है और उन्होंने चार साल की नौकरी कर ली है, तो उनका ग्रेड पे 54 सौ हो जाएगा। यह नियम, केंद्रीय बलों में स्वत: ही लागू नहीं होता। इसके लिए इंस्पेक्टरों को अदालत में जाना पड़ रहा है। आईटीबीपी इंस्पेक्टर के बाद बीएसएफ इंस्पेक्टरों ने दिल्ली हाईकोर्ट से जीत हासिल की। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने सीआरपीएफ इंस्पेक्टरों के हक में फैसला सुनाया। हालांकि सीआरपीएफ ने अभी तक इन्हें वित्तीय फायदा नहीं दिया। फिलहाल, इंस्पेक्टरों द्वारा अदालत में अवमानना याचिका लगाने की तैयारी की जा रही है।   

'सीबीडीटी' इंस्पेक्टरों को नहीं मिला ये फायदा  
इस मामले में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स 'सीबीडीटी' में कार्यरत कर्मियों को भी यह फायदा नहीं मिला था। सीबीडीटी के इंस्पेक्टर एम सुब्रमणयम, '167/2009' कैट में चले गए। कैट ने भी इंस्पेक्टर के पक्ष में फैसला नहीं दिया। उसके बाद एम सुब्रमणयम, केस संख्या '13225/2010' के तहत मद्रास हाईकोर्ट में चले गए। सरकार ने अदालत में कहा, आपको ये लाभ नहीं मिलेगा। जो पदोन्नत होकर आए हैं, उन्हीं को ये लाभ मिलेगा। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, उक्त कर्मचारी को यह लाभ दिया जाए। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार, सुप्रीम कोर्ट 8883/2011 में चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद सरकार को लताड़ लगाई। मद्रास हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। केंद्र सरकार, इसके बाद भी संबंधित कर्मचारी को फायदा देने के लिए तैयार नहीं हुई। 

फिर भी फायदा देने को तैयार नहीं थी सरकार 
सरकार की अपील भी 10 अक्तूबर 2017 को डिसमिस हो गई। सरकार ने एक नहीं, बल्कि दो रिव्यू दो पेटिशन किए थे। ये भी 23 अगस्त 2018 को डिसमिस कर दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस मामले में जो एसएलपी रिजेक्ट की गई थी, केस का वही स्टे्टस रहेगा। इसके बाद सीबीडीटी ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर कर लिया। सुप्रीम कोर्ट में पेटिशन रद्द होने के बाद केंद्र सरकार ने ग्रुप बी में यह आदेश लागू कर दिया। मतलब, वित्त मंत्रालय के 2008 में जारी कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' के अनुसार, जिन कर्मियों का 48 सौ रुपये का ग्रेड पे है और उन्होंने चार साल की नौकरी कर ली है, उनका ग्रेड 'पे' 54 सौ रुपये हो जाएगा, ये फायदा दे दिया गया।  

सरकार ने उस वक्त एक नई शर्त लगा दी 
सरकार ने कहा, यह आदेश केवल ग्रुप 'बी' वालों के लिए ही लागू होगा। हालांकि यह 'पे' ग्रेड तो ग्रुप 'ए' में भी आता है, लेकिन ग्रुप 'बी' में ही ये फायदा दिया गया है। इसके पीछे वजह बताई गई कि ग्रुप 'बी' में कमजोर वर्ग है, उन्हें आर्थिक तौर पर सफल बनाना है। केंद्र सरकार ने उस वक्त एक नई शर्त लगा दी। सरकार ने कहा, सभी को ये फायदा नहीं मिलेगा, केवल पदोन्नति वालों को ही दिया जाएगा। खास बात है कि केंद्र सरकार ने सभी विभागों में यह फायदा दिया, लेकिन अर्धसैनिक बलों को इससे बाहर रखा। ग्रुप बी 'सिविल' वालों को लाभ मिला, लेकिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को नहीं दिया। आईटीबीपी इंस्पेक्टर 'फार्मासिस्ट' सुशील कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। उसमें कहा गया कि मद्रास हाईकोर्ट ने इस केस में फैसला दिया है। 

हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट का फैसला 
हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट ने भी इस केस में फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित रखा। सुशील कुमार ने उक्त फैसलों के आधार पर 21 जून 2020 को आईटीबीपी को लीगल नोटिस भेजा था। बल ने उसे 18 सितंबर 2020 को रिजेक्ट कर दिया। उसके बाद 43321/2021 रिट पिटीशन किया। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहकर पिटीशन को डिस्पोज कर दिया कि विभाग इस रिट पिटीशन को ही प्रतिवेदन मानें। इसी पर एक विस्तारित आदेश जारी करें। इसके बावजूद विभाग ने प्रतिवेदन को 24 सितंबर 2021 को रिजेक्ट कर दिया। उसके बाद रिट पिटीशन हाईकोर्ट में लगाई गई। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने आईटीबीपी से कहा है, आठ सप्ताह में याचिकाकर्ता को वित्त मंत्रालय के 2008 में जारी कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' के अनुसार, फायदा दिया जाए। ये फायदा, छह जुलाई 2019 से देना होगा। 

जीती हुई लड़ाई हार गए बीएसएफ इंस्पेक्टर 
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बीएसएफ हेडक्वार्टर ने अपने स्पीकिंग ऑर्डर में ऐसे तर्क दिए हैं, कि इंस्पेक्टर हैरान रह गए। स्पीकिंग ऑर्डर में कहा गया है कि केंद्र सरकार के दूसरे विभागों में समान वेतनमान वाले कर्मियों को जो आर्थिक फायदे मिलते हैं, वे बीएसएफ में जीडी इंस्पेक्टरों के लिए नहीं हैं। यह ऑर्डर बीएसएफ के इंस्पेक्टर आनंद प्रताप सिंह व 128 अन्य की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के बाद आया है। इंस्पेक्टर आनंद प्रताप सिंह व अन्य ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष याचिका लगाई थी कि उन्हें 48 सौ रुपये के 'ग्रेड पे' में काम करते हुए चार साल से अधिक समय हो गया है, लेकिन सरकार उन्हें 54 सौ रुपये का वेतनमान नहीं दे रही। यह वेतनमान सहायक कमांडेंट का होता है। इंस्पेक्टर के बाद अगली पदोन्नति बतौर 'सहायक कमांडेंट' होती है। पदोन्नति तो तभी मिलती है, जब पद खाली हों। इसमें तो लगभग पंद्रह साल तक लग जाते हैं। तब तक इंस्पेक्टरों को सहायक कमांडेंट का ग्रेड पे देने का प्रावधान है, ताकि इन्हें आर्थिक नुकसान न हो। ये डीओपीटी का नियम है। इसके चलते ये सभी कार्मिकों पर लागू होता है। इस मामले में विभाग ने कई तरह की बाधाएं खड़ी करने का प्रयास किया, मगर दिल्ली हाईकोर्ट ने कोई बात नहीं सुनी।
 
आठ सप्ताह के अंदर बीएसएफ निर्णय ले 
दिल्ली हाईकोर्ट ने गत वर्ष 12 फरवरी को आनंद प्रताप सिंह व अन्य 128 अन्य की रिट पिटीशन संख्या 1743/2025 पर आदेश जारी किया था। हाई कोर्ट ने बीएसएफ को यह कहते हुए पिटीशन का निपटारा किया कि इस पिटीशन को ही प्रतिवेदन माना जाए। आठ सप्ताह के अंदर बीएसएफ निर्णय लेकर आदेश जारी करे। हाईकोर्ट ने कहा था कि इस मामले में आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार के केस की तरह सभी मापदंड पूरे होते हैं तो इन इंस्पेक्टरों को भी उक्त फायदा दे दिया जाए। बीएसएफ ने इसके एवज में छह जनवरी को एक आदेश निकाला। अदालत ने दो माह का समय दिया था, लेकिन बीएसएफ ने आदेश निकालने में 11 महीने ले लिए। 

बीएसएफ इंस्पेक्टरों को फायदा नहीं 
बल के आदेश में कहा गया है कि आनंद प्रताप सिंह, 2005 में बीएसएफ में एसआई भर्ती हुए थे। 2009 में इंस्पेक्टर बन गए। यानी वे 4800 ग्रेड में आ गए। साल 2019 में उनकी 10 साल की सेवा पूरी हो गई। जब इस मामले में डीओपीटी के नियमानुसार कार्यवाही नहीं हुई तो उन्होंने डीजी बीएसएफ को 7 नवंबर 2024 और 9 दिसंबर 2024 को एक प्रतिवेदन दिया कि उन्हें एनएफएफयू का फायदा दिया जाए। इसमें उन्होंने 29 अगस्त 2008 को जारी वित्त मंत्रालय के ओएम का हवाला दिया। इसमें 54 सौ रुपये का ग्रे पे की बात कही गई है। बीएसएफ ने 22 नवंबर 2024 और 6 जनवरी 2025 को जवाब दिया कि आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार के केस में दिए गए फैसले के अनुसार, बीएसएफ इंस्पेक्टरों को फायदा नहीं मिल सकता। इसके बाद बीएसएफ इंस्पेक्टरों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगा दी। 

स्पीकिंग ऑर्डर में दिया गया ऐसा तर्क 
बीएसएफ के स्पीकिंग ऑर्डर में कहा गया है कि हमने रिट पिटीशन पढ़ी है। वित्त मंत्रालय के 29 अगस्त 2008 का रेजोल्यूशन है, लेकिन वह कुछ ही सेवाओं पर लागू होता है। उसके दायरे में याचिकाकर्ता नहीं आते। ये ग्रुप बी का मामला है। जबकि एनएफएफयू ग्रुप 'ए' वालों को मिलता है। इंस्पेक्टर सुशील कुमार ग्रुप 'बी' में हैं तो उसे मिला है। जानकारों का कहना है कि ये तर्क बीएसएफ ने खुद से जोड़ दिया कि ये एनएफएफयू ग्रुप ए को मिलता है 'बी' को नहीं मिलता है। आईटीबीपी इंस्पेक्टर सुशील कुमार फार्मासिस्ट हैं। बीएसएफ वाले जीडी कैडर के हैं। यहां पदोन्नति के अवसर ज्यादा हैं। ऐसे में एनएफएफयू की क्या जरुरत है। 

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