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संसद में सीएपीएफ बिल पारित: पूर्व कैडर अफसर बोले- फिर से सर्वोच्च अदालत में जाएंगे, नए एक्ट को देंगे चुनौती

सार

सीएपीएफ बिल 2026 संसद के दोनों सदनों में पारित हो गया। पूर्व अफसरों ने कहा, हम फिर से सर्वोच्च अदालत में जाएंगे और नए एक्ट को चुनौती देंगे। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटकर कैडर अधिकारियों के हितों पर कुठाराघात किया है। उन्होंने कहा, हमें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है। 
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सीएपीएफ - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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'सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल 2026', संसद के दोनों सदनों में पारित हो गया है। विपक्षी दलों ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे संसद की सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने का आग्रह किया था। दूसरी तरफ, इस विधेयक के खिलाफ पिछले कई दिनों से मुहिम छेड़े सीएपीएफ के पूर्व कैडर अफसरों ने इसे 'काला कानून' बताया है। पूर्व अफसरों ने कहा, हम फिर से सर्वोच्च अदालत में जाएंगे और नए एक्ट को चुनौती देंगे। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटकर कैडर अधिकारियों के हितों पर कुठाराघात किया है। उन्होंने कहा, हमें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है। 

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सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा ये बिल 
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में इस बिल पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा, यह बिल संघीय ढांचे और संविधान के अनुरुप है। इससे सीएपीएफ की कार्यकुशलता में वृद्धि होगी। अफसरों और जवानों का मनोबल बढ़ेगा। इससे आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय का द्रष्टिकोण विकसित होता है। यह बिल सीएपीएफ अफसरों की सेवा शर्तों में अस्पष्टताओं और प्रबंधन से जुड़ी कई तरह की चुनौतियों का हल करने में सक्षम होगा। नित्यानंद राय ने कहा, इस बिल को लेकर विपक्ष ने अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास किया है। वे बिल को या तो समझ नहीं पाए या फिर समझे तो उन्होंने इसे नहीं समझने का दिखावा किया है।
 
दोबारा से सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे पूर्व कैडर अफसर.   
पूर्व कैडर अफसरों ने कहा, सरकार ने इस बिल को दोनों सदनों से पास करा लिया है। अब दोबारा से सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे। पैरामिलिट्री फोर्स 'संघ के सशस्त्र बल' हैं। ये अनुशासित फोर्स हैं। बलों के मौजूदा और पूर्व कैडर अफसर ही नहीं, बल्कि संसद में कांग्रेस, सपा, टीएमसी और आप सहित कई विपक्षी दलों ने भी इस बिल का विरोध किया है। पूर्व कैडर अफसरों को सर्वोच्च अदालत पर पूरा भरोसा है। 
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पदोन्नति के अवसरों पर पड़ेगा असर
बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा, इससे कैडर अधिकारियों की पदोन्नति के अवसर कम हो जाएंगे। सरकार को सुप्रीम कोर्ट का निर्णय, वैधानिक हस्तक्षेप के जरिए पलटना नहीं चाहिए था। कैडर अफसर, एक दशक से अपने हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। 2015 में दिल्ली हाईकोर्ट, 2019 और 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कैडर अफसरों की मांगों को जायज बताया है। इस मामले में अवमानना का केस अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। बीएसएफ के पूर्व आईजी एमएस मल्ही ने कहा, दिल्ली हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कैडर अफसरों के हक में फैसला दिया है। इसके बावजूद सरकार ने इसे लागू नहीं किया। सीएपीएफ, अनुशासित बल हैं। हम दोबारा से सुप्रीम कोर्ट में सरकार के नए एक्ट को चुनौती देंगे। हमारे पास कानूनी मदद के अलावा दूसरा कोई आधार नहीं है। 
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हमें आईपीएस से कोई दिक्कत नहीं है
सीआरपीएफ के पूर्व आईजी केके शर्मा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने सीएपीएफ के कैडर अफसरों के हक में फैसला दिया है। हमने, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से अपील की थी कि वे सीएपीएफ बिल को वापस लें। नहीं तो कम से कम बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास ही भेज देते। वहां पर हमारी बात सुनी तो जाती। कैडर अफसरों को आईपीएस से कोई दिक्कत नहीं है। वे तो एक तय संख्या में आ रहे हैं, आगे भी आएंगे। अभी तो सुप्रीम कोर्ट का न्याय लागू करने की बात थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी न्याय किया है, आगे भी न्याय होगा। संविधान की रक्षा का दायित्व सर्वोच्च अदालत का है। हमें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है, वहां से जीत मिलेगी।

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