केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 12 जून को नई दिल्ली में आयोजित चिंतन शिविर-2 की अध्यक्षता करते हुए कई अहम सुझाव दिए थे। अब सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में उन सुझावों को त्वरित गति से लागू करने की तैयारी हो रही है। सीएपीएफ की सभी यूनिटों को वह सूची भेज दी गई है, जिस पर उन्हें अमल करना है।
इसमें कई खास बाते हैं जो इन बलों में पहले कभी नहीं देखी गई। जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, अपने मुख्यालय, रेंज, ग्रुप केंद्र, बटालियन, कंपनी और प्लाटून/पोस्ट, जहां भी तैनात हों, वहां के भौगोलिक क्षेत्र के इतिहास की विस्तृत जानकारी एकत्रित करेंगे। इसके बाद उन्हें वहां के इतिहास का दस्तावेज तैयार करना होगा।
दूसरा, सीमा की सुरक्षा का मतलब केवल बॉर्डर की रक्षा नहीं है, बल्कि उसे स्थानीय जिले की कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा माना है। तीसरा, अगर सीएपीएफ को धार्मिक अतिक्रमण की कोई जानकारी मिलती है तो वहां स्थानीय प्रशासन की इजाजत से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। चौथा, आत्महत्या/भ्रातृहत्या के बढ़ते मामलों में अब नई पहल की गई है। जहां भी ऐसी घटनाएं होंगी, वह मामला संबंधित इकाई के अधिकारी की 'वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन' में दर्ज किया जाएगा।
बल की खेल नीति में करें आवश्यक बदलाव
इन बलों की सामान्य समस्याएं क्या हैं, उनकी सूची तैयार करें। उनका एक साथ समाधान खोजा जाए। सीएपीएफ में कल्याण और खेल कूद को लेकर एक संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जाए। गृह मंत्री की तरफ से मिले इस सुझाव पर भी काम प्रारंभ हो गया है कि सीमा की सुरक्षा, इसका मतलब केवल बॉर्डर की रक्षा नहीं है, बल्कि उस स्थानीय जिले की कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मुद्दा है। केंद्रीय सशस्त्र बल, खेलों के क्षेत्र में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकें, इसके लिए सभी बल अपनी एक टीम तैयार करें।
इस मकसद को लेकर बल की खेल नीति में आवश्यक बदलाव किए जाएं। अगर खेल कूद को प्रोत्साहन मिलता है तो बलों में होने वाली आत्महत्या या अपने साथी को मारने जैसी घटनाओं पर असर पड़ेगा। इन बलों में मुख्यालय, कंपनी, प्लाटून या पोस्ट स्तर पर सभी अधिकारियों और कार्मिकों के लिए परंपरागत खेलों, जैसे कबड्डी, खो-खो, फुटबॉल, बास्केटबॉल और हॉकी आदि का आयोजन हो। आईपीएस अधिकारी भी कभी-कभार खेल कूद के पीरियड में जवानों के साथ रहें। जवानों का प्रतिदिन एक घंटा मिट्टी के साथ रहना, सुनिश्चित किया जाए। खेल गतिविधियों को जवानों के परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास करें।
सीएपीएफ अस्पताल में लोग खुद को भयभीत न समझें
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों आयुष्मान भारत योजना, इसे प्रभावी तरीके से लागू करें। इसके क्रियान्वयन में जो भी दिक्कतें आ रही हैं, उनका विवरण एवं निदान के लिए सुझावों की एक सूची तैयार कर उसे गृह मंत्रालय को भेजें। सीएपीएफ अस्पतालों को आम जनता के लिए खोला जाए। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए सीएपीएफ अस्पतालों में आम लोगों की आवाजाही को सुगम बनाएं। लोग वहां तक पहुंचने में खुद को भयभीत एवं असहज न समझें। बल मुख्यालय, इस प्रक्रिया पर निगरानी रखें। ई-आवास के तहत मौजूदा समय में जितने भी आवास खाली हैं, उन्हें इस वर्ष दीपावली तक जरुरतमंद जवानों को आवंटित कर दिया जाए। जहां पर नए आवास तैयार हो रहे हैं, वहां यह सुनिश्चित करें कि उनका निर्माणकार्य पूरा होने के दो माह के भीतर जरुरतमंद जवानों को उन्हें आवंटित कर दें।
भौगोलिक क्षेत्र के इतिहास की विस्तृत जानकारी एकत्रित करें
नॉन जीडी रिक्रूटमेंट के सेवा नियमों में बदलाव की जरुरत है। सभी बलों के प्रमुख, हर साल दिसंबर तक रिक्त पदों को भरना सुनिश्चित करें। इस प्रक्रिया में सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों, शहीदों के परिजनों, नौकरी के दौरान दिवंगत हुए कार्मिकों के परिजन और सक्रिय ड्यूटी पर घायल हुए कार्मिकों के परिजनों को प्राथमिकता मिले। सीसीटीवी को केंद्रीय कंट्रोल रूम से जोड़ा जाए। इसके लिए बल में ही ऐसे तकनीकी अधिकारियों का चयन करें, जो इस क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हों। बल में तकनीकी विशेषज्ञों की टीम, एंटी ड्रोन सिस्टम तैयार करने के लिए काम करे। सीएपीएफ को अब नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी, आम लोगों को देनी होगी। नशा मुक्ति केंद्र में उनका इलाज कराना होगा। सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, अपने मुख्यालय, रेंज, ग्रुप केंद्र, बटालियन, कंपनी और प्लाटून/पोस्ट, जहां भी तैनात हो, वहां के भौगोलिक क्षेत्र के इतिहास की विस्तृत जानकारी एकत्रित करें। उसका दस्तावेज तैयार करें। इस जानकारी के आधार पर उस क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक व आर्थिक व्यवस्था का अध्ययन करें। इस तरह की जानकारियां, उस इलाके के इतिहास को जानने के लिए हमारे प्रोफेशनल काम में मदद करेगी।
धार्मिक अतिक्रमण पर तुरंत करें कार्रवाई
सीमावर्ती क्षेत्रों में, जहां सीएपीएफ तैनात है, वहां अतिक्रमण पर विशेष नजर रखें। खासतौर पर, धार्मिक अतिक्रमण के बारे में जानकारी मिली है तो त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस कार्य के लिए बल का लोकल कमांडर, स्थानीय प्रशासन के साथ लिखित पत्राचार करें। यह पत्राचार उस वक्त तक जारी रहे, जब तक यथोचित कार्रवाई न हो जाए। सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कैंप, अपनी रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएं स्थानीय लोगों से खरीदना सुनिश्चित करें। वाईब्रेंट विलेज प्रोग्राम, सीमावर्ती इलाकों के लिए शुरू किया गया था, अब वह प्रोग्राम सीआरपीएफ भी लागू करे। अपनी तैनाती के कुछ गांवों को उक्त योजना के तहत चिन्हित करें। वहां पर वाईब्रेंट विलेज प्रोग्राम मानकों के अनुसार, कार्यवाही प्रारंभ करें।
आत्महत्या, लीडरशीप पर सवालिया निशान
केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता वाले चिंतन शिविर में आत्महत्या/भ्रातृहत्या के मामलों पर गंभीर चिंता जाहिर की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे मामले, कहीं न कहीं, हमारे पर्यवेक्षण/लीडरशीप पर सवालिया निशान लगाते हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे जवानों के साथ खाना खाएं। उनके साथ खेलकूद में भाग लें। उनके परिवारों के बारे में जानकारी रखें। उनसे जुड़े मामलों को मेकेनिकल तरीके से नहीं, बल्कि आत्मीय तरीके से देखें। ऐसा होने पर इन घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है। यदि किसी अधिकारी के अधीन संस्थान में इस तरह की घटना होती है तो उसके 'वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन' में उस बाबत लिखा जाएगा। 'भारत के वीर' इस फंड को आगे बढ़ाने की जरुरत है। इसका ज्यादा से ज्यादा प्रचार करें। लोगों को वीर ट्रस्ट की जानकारी दें। इस कोष में व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपना योगदान दें, इसके लिए सीएपीएफ अधिकारी उनसे संपर्क करें।