संसद की एक स्थायी समिति ने विमान यात्रियों के टिकट कैंसिल कराने पर उनसे मूल किराये का अधिकतम 50 फीसदी ही वसूले जाने की सिफारिश शुक्रवार को सरकार को सौंपी। समिति ने विमान किराये की अधिकतम सीमा तय किए जाने का भी आग्रह किया है। समिति का कहना है कि इससे विमानन कंपनियों के ग्राहकों को लूटने वाले तरीकों को हतोत्साहित करने में मदद मिलेगी।
राज्यसभा सदस्य डैरेक ओ ब्रायन की अध्यक्षता वाली परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति की विभाग संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट शुक्रवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में समिति ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से कहा है कि निजी विमानन कंपनियों पर न्यूनतम दर वाली अधिक से अधिक टिकट उपलब्ध कराने के लिए दबाव बनाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि आम आदमी के फायदे के लिए विमान किराये को न्यूनतम लाभ के स्तर पर तय किया जाए।
समिति ने मंत्रालय के इस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें लगेज शुल्क और अनियंत्रित किराये को वैश्विक स्तर पर मार्केट आधारित बताया गया था। समिति ने कहा कि भारतीय परिस्थितियों में विमान किराये और लगेज शुल्क का नियमन आवश्यक है। समिति ने उड्डयन मंत्रालय और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को इस नियमन के लिए आगे बढ़ने की सिफारिश की है।
साथ ही समिति ने मंत्रालय को महज यात्रियों की शिकायतें विमानन कंपनियों तक पहुंचाने वाला मैसेंजर बनने के बजाय अभद्र व्यवहार वाले एयरलाइंस स्टाफ पर कार्रवाई करने व कंपनी पर भारी जुर्माना लगाने वाला प्राधिकरण बनने की सलाह भी दी है।