उत्तराखंड के पानी में यूपी का 60 फीसदी हिस्सा
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उत्तराखंड से रामपुर में यूपी बार्डर से जुड़ी नहरों को पानी नहीं मिल पा रहा। बताया गया है कि उत्तराखंड के प्रमुख जलाशयों में जलस्तर काफी नीचे जाने की वजह से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। उत्तराखंड के बोर जलाशय में 230.5 मीटर, हरीपुरा जलाशय में 223.8 मीटर जलस्तर बचा है। तुमड़िया जलाशय का भी ऐसा ही हाल है।
इन जलाशयों के जलस्तर का स्टॉक 246 मीटर होने के बाद ही यूपी की नहरों को पानी मिल पाएगा। अकेले रामपुर जिले में 93 नहरें सूखी हैं, जबकि 25 नहरों के जरिये टेल तक पानी अप्रैल में पहुंचना था। इस बाबत रामपुर सिंचाई प्रखंड के अधिशासी अभियंता नु 22 अप्रैल को ऊधम सिंह नगर में अपने समानांतर अधिकारी को एक पत्र भी लिखा है।
बात रामपुर की करें तो 347981 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती हो रही है। 362 सरकारी नलकूपों के साथ 93 नहरों से सिंचाई होती है। इन नहरों के लिए उत्तराखंड के बौर जलाशय, हरिपुरा और तुमडिय़ा जलाशय से पानी छोड़ा जाता है। इस समय धान, गन्ना, मैंथा, हरा चारा की फसलों को पानी की जरूरत है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उत्तराखंड शासन से नहरों में पानी छोड़ने की पेशकश की पर उत्तराखंड से यह कहते हुए इनकार कर दिया गया कि जलाशयों में पानी नहीं है। जलस्तर का ब्योरा भी साथ ही भेज दिया। पानी न मिलने से उत्पादन प्रभावित होगा इसलिए अधिशासी अभियंता सिंचाई की ओर से उत्तराखंड सरकार को पुन: चिट्ठी भेजी गई है।
पांच दिन में सात मीटर खिसका जलस्तर
पांच दिन में सात मीटर खिसका जलस्तर
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उत्तराखंड के हरिपुरा और बौर जलाशयों का जल स्तर पांच दिन में सात मीटर नीचे चला गया। तुमडिय़ा जलाशय का भी जल स्तर भी तेजी से खिसक रहा है। सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 20 अप्रैल को बौर जलाशय का जल स्तर 237.10 और हरिपुरा जलाशय का जलस्तर 237.07 मीटर था। पांच दिन में बौर जलाशय का जलस्तर घटकर 230.05 और हरिपुरा का 223.08 मीटर रह गया।
रामपुर। उत्तराखंड के पानी में यूपी का हिस्सा 60 प्रतिशत है, इसके बाद भी नहरों को पर्याप्त पानी नहीं मिला पाता। यूपी से उत्तराखंड अलग होने पर पानी का बंटवारा किया गया था। बड़ी संख्या में यूपी के लोग खेती-किसानी करते हैं, इसलिए उत्तराखंड का पानी में यूपी का 60 फीसदी शेयर तय किया गया, लेकिन कभी भी यूपी को भरपूर पानी नहीं मिल सका। रबी और खरीफ में नहरों के संचालन को तैयार होने वाले रोस्टर में साफ लिख जाता है कि उत्तराखंड से पानी मिलने पर ही रोस्टर के मुताबिक नहरें चलाई जा सकेंगी। खरीफ फसल का भी रोस्टर तैयार है। इस वक्त 25 नहरों में टेल तक पानी पहुंचना चाहिए।
'कोसी नदी से 32 नहरें निकाली गई हैं। कोसी में पानी होगा तो इन नहरों को भी पानी मिलेगा। कोसी खुद सूखी पड़ी है, इसलिए उससे जुड़ी नहरें भी सूखी हैं। 21 नहरें कल्याणी, घूंघा और जानसठ सिस्टम से चलाई जाती हैं। तीनों सिस्टम भी सूखे पड़े हैं। उत्तराखंड के जलाशयों में पानी का टोटा है। ऐसे में नहरों को पानी नहीं मिल पा रहा है। उत्तराखंड ने पानी देने से साफ इंकार कर दिया। पानी छोड़ने के लिए उत्तराखंड के अधिकारियों को फिर पत्र लिखा गया है। उत्तराखंड के जलाशयों का जल स्तर बढ़ने पर ही नहरों को पानी मिल सकेगा।'
- वीके अग्रवाल अधिशासी अभियंता (नहर)