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SC: क्या एक तरह के आरोपों पर एनआई एक्ट आरोपी पर मुकदमा चलाया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा

Thu, 11 Aug 2022 08:38 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीआरपीसी की धारा 300 के अनुसार, किसी व्यक्ति को एक बार दोषी ठहराए जाने या बरी कर दिए जाने के बाद उस पर उसी अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए। अदालत ने इसे बड़ी पीठ को भेज दिया। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक बड़ी पीठ को इस सवाल का हवाला दिया कि क्या किसी आरोपी पर पूर्व दोषसिद्धि या बरी होने के बावजूद एक ही तरह के आरोपों के लिए नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (एनआई) अधिनियम और आईपीसी के तहत अलग से मुकदमा चलाया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे को भी संदर्भित किया कि क्या इस तरह के मुकदमे में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 300 (1) लागू होगी। सीआरपीसी की धारा 300 के अनुसार, किसी व्यक्ति को एक बार दोषी ठहराए जाने या बरी कर दिए जाने के बाद उस पर उसी अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जाना चाहिए। अदालत ने इसे बड़ी पीठ को भेज दिया। 

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न्यायमूर्ति एस ए नज़ीर और न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी की पीठ ने शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए कुछ पिछले फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इन मामलों में लिए गए विचार परस्पर विरोधी थे। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के दिसंबर 2018 के आदेश को चुनौती देने वाली एक अपील पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश कार्यवाही को रद्द कर दिया था जो कि कोयंबटूर में मजिस्ट्रियल कोर्ट में लंबित है।

अपने फैसले में शीर्ष अदालत ने अपीलकर्ता द्वारा उद्धृत निर्णय पर ध्यान दिया, इससे पहले कि उसने कहा था कि एनआई अधिनियम के तहत अपराध और आईपीसी के तहत अपराध साबित करने की आवश्यकता अलग है और इसलिए बाद के मामलों को किसी भी वैधानिक प्रावधानों द्वारा प्रतिबंधित नहीं किया जाता है। 

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