गुजरात की प्रदूषित साबरमती नदी को विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर बुधवार को साफ करने का एक अभियान शुरू किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के राष्ट्रीय जल गुणवत्ता कार्यक्रम के तहत साबरमती नदी को देश की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक गिना जाता है।
‘स्वच्छ साबरमती महा अभियान’ की शुरुआत मुख्यमंत्री विजय रूपाणी द्वारा ऐतिहासिक साबरमती नदी के पास नदी तट से की गयी। यह अभियान नौ जून तक चलेगा।
महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका से 1915 में लौटने के बाद इस आश्रम की स्थापना साबरमती नदी के तट पर की थी।
बुधवार को अहमदाबाद में दुफनाला और वासना बैराज के बीच इस स्वच्छता अभियान में हजारों नागरिकों ने हिस्सा लिया।
रूपाणी ने भी नदी तल के एक हिस्से को साफ करने में हिस्सा लिया, जो लगभग सूख गई है।
मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, "विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर हमने साबरमती स्वच्छता अभियान शुरू किया है। साबरमती एक ऐतिहासिक नदी है और ऐसा अभियान कई वर्षों में पहली बार शुरू किया गया है। अहमदाबाद नगर निगम की पहल के चलते स्वच्छता अभियान में हिस्सा लेने के लिए हजारों की संख्या में लोग बाहर आये हैं।"
उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान नदी तट को प्रदूषकों से मुक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा, "साबरमती नदी मानसून के बाद एक साफ नदी के तौर पर बहेगी।"
उन्होंने साथ ही नागरिकों से अपील की कि वे स्वैच्छिक तौर पर अभियान में हिस्सा लें।
जैविक ऑक्सीजन की मांग पर आधारित सीपीसीबी के अध्ययन के मुताबिक साबरमती देश की सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल है। यह नदी गुजरात में तीन सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है। अन्य दो प्रदूषित नदियां अमलखाड़ी और खाड़ी है।
इस अभियान के पीछे अमदाबाद नगरपालिका आयुक्त विजय नेहरा की सोच काम कर रही है और वे बहुत खुश हैं। उन्होंने ट्वीट किया, "अहमदाबाद में आज जो हो रहा है उसे बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं। साबरमती को साफ करने के लिए शहर एक साथ आया है। यहां इतने लोग एकत्रित हुए हैं कि नदी तल में लोगों के खड़े होने की भी जगह नहीं है।"