Jhalda Civic Body Row: कांग्रेस पार्षद शीला चटर्जी ने छह अन्य पार्षदों के साथ कलकत्ता हाईकोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत झालदा नगर पालिका में अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार को कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पुरुलिया जिले की झालदा नगरपालिका में अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त करने के टीएमसी सरकार के प्रशासनिक आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही पद भरने के लिए 16 जनवरी को चुनाव कराने का निर्देश दिया। बता दें, झालदा नगरपालिका में टीएमसी ने कथित रूप से बहुमत खो दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने जाबा मछोवर को झालदा नगरपालिका का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया था।
विज्ञापन
इस मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने आदेश दिया कि पुरुलिया के जिलाधिकारी की कड़ी निगरानी में चुनाव कराया जाए, लेकिन अदालत की इजाजत के बिना नवनिर्वाचित अध्यक्ष को नगरपालिका का प्रभार नहीं सौंपा जाएगा।न्यायमूर्ति सिन्हा ने जिलाधिकारी को सुनवाई की अगली तारीख 17 जनवरी को सीलबंद लिफाफे में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
कांग्रेस पार्षद शीला चटर्जी ने छह अन्य पार्षदों के साथ हाईकोर्ट के समक्ष पश्चिम बंगाल सरकार के शहरी विकास और नगरपालिका मामलों के विभाग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत झालदा नगरपालिका में अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने नवंबर 2022 में अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें उन्होंने विश्वास-मत खो दिया था और उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।
विज्ञापन
शीला चटर्जी को चुना गया था नया अध्यक्ष
पार्षदों के मुताबिक, अध्यक्ष पद के रिक्त स्थान को चुनाव कराकर भरा जाना था। लेकिन उपाध्यक्ष सात दिनों के भीतर इस संबंध में बैठक बुलाने में विफल रहे और कहा कि उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि बीते साल दो दिसंबर की शाम को मीडिया रिपोर्ट से पता चला कि राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल नगरपालिका अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के तहत नए अध्यक्ष का चुनाव होने तक अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया है। उन्होंने कहा कि अगले दिन एक बैठक हुई, जिसमें शीला चटर्जी को नगरपालिका का नया अध्यक्ष चुना गया।
सरकार ने अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को रोका...
इन दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को अध्यक्ष के चुनाव के लिए तीन दिसंबर को होने वाली बैठक का नतीजा आने का इंतजार करना चाहिए था। अदालत ने कहा कि सरकार ने अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को सीधे तौर पर बाधित किया और ऐसी पार्टी के एक पार्षद को अंतरिम अध्यक्ष बनाया, जिसके पास अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए बहुमत नहीं है।