पश्चिम बंगाल के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने कहा कि सरकार इस उद्देश्य के लिए यहां नेताजी इंडोर स्टेडियम की पेशकश करने को तैयार है। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि बैठक के दौरान, सभा को संबोधित करने वाले व्यक्ति कोई घृणास्पद भाषण नहीं देंगे और अन्य धर्मों या संप्रदायों से संबंधित लोगों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएंगे।
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने शुक्रवार को इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) को अपनी 21 जनवरी की रैली को एस्प्लेनेड में विक्टोरिया हाउस के सामने से एक अलग स्थान पर स्थानांतरित का निर्देशे जारी किया। इससे पहले कोर्ट की एकल पीठ ने वर्तमान स्थान पर रैली आयोजित करने की अनुमति दी थी।
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अनुमति को अस्वीकार करते हुए, मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने निर्देश दिया कि प्रतिभागियों को गुरुवार को अपने आदेश में एकल पीठ द्वारा लगाए गए सभी प्रतिबंधों का पालन करना होगा। न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य वाली खंडपीठ ने आईएसएफ को राज्य सरकार द्वारा चयनित स्थल को स्वीकार करने और शांतिपूर्ण ढंग से बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया।
नेताजी इंडोर स्टेडियम की पेशकश करने को तैयार है सरकार
पश्चिम बंगाल के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने कहा कि सरकार इस उद्देश्य के लिए यहां नेताजी इंडोर स्टेडियम की पेशकश करने को तैयार है। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि बैठक के दौरान, सभा को संबोधित करने वाले व्यक्ति कोई घृणास्पद भाषण नहीं देंगे और अन्य धर्मों या संप्रदायों से संबंधित लोगों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएंगे।
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रैली के अंत में 21 जनवरी, 2023 को हिंसा के कारण आईएसएफ को संयुक्त पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) द्वारा विक्टोरिया हाउस के सामने रैली आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। यह भी कहा गया कि उस तारीख को तीन कार्यक्रम निर्धारित हैं, जिसमें कोलकाता पुलिस मैराथन भी शामिल है और इसमें लगभग 25,000 लोग भाग लेंगे।
बता दें कि, न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने गुरुवार को याचिकाकर्ता राजनीतिक दल आईएसएफ को 21 जनवरी को अपने स्थापना दिवस पर विक्टोरिया हाउस के सामने एक बैठक आयोजित करने की अनुमति दी थी। उन्होंने निर्देश दिया कि बैठक में भाग लेने वाले अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे और हिंसा नहीं भड़कायेंगे। अदालत ने निर्देश दिया था कि पूरे कार्यक्रम की पुलिस और याचिकाकर्ताओं द्वारा वीडियोग्राफी की जाएगी। राज्य को पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मियों को तैनात करने और सहायता प्रदान करने और प्रतिभागियों के साथ-साथ राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था।