कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के भूपतिनगर में बम धमाके के संदिग्धों को पकड़ने के लिए गई एनआईए की टीम के अधिकारियों को अंतरिम राहत दी है। दरअसल, आरोप है कि छापेमारी के दौरान एनआईए की टीम ने कुछ स्थानीय लोगों पर कथित तौर पर हमला किया। वहीं एनआईए का कहना है कि उसके अफसरों पर खुद हमला हुआ था। इसके बावजूद उसने संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया।
इसी मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच जारी रखने की अनुमति दी। अदालत ने निर्देश दिया कि बंगाल पुलिस को मामले में पूछताछ के लिए एनआईए अधिकारियों को 72 घंटे का नोटिस देना होगा। साथ ही यह पूछताछ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जा सकेगी।
एनआईए ने की थी एफआईआर रद्द करने की मांग
एनआईए ने अपने अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की अपील करते हुए याचिका दाखिल की थी। उसने अपने अधिकारियों को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा देने की भी मांग की थी। इस पर जज जय सेनगुप्ता ने पुलिस को निर्देश दिया कि मामले में जांच के लंबित रहने के दौरान एनआईए के उन अधिकारियों को गिरफ्तार न किया जाए, जिनके खिलाफ एक आरोपी की पत्नी ने मारपीट और गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। हाईकोर्ट ने इस मामले पर 29 अप्रैल को सुनवाई तय की है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने एनआईए टीम पर हुए हमले के मामले में मंगलवार को एनआईए के दो अधिकारियों को समन जारी किया है। इस समन में बंगाल पुलिस ने हमले की शिकायत करने वाले दोनों अधिकारियों और हमले में घायल हुए एक अधिकारी को भी बुलाया है। हमले में घायल अधिकारी को बतौर गवाह बुलाया गया है। घायल अधिकारी को अपने मेडिकल दस्तावेज भी लाने को कहा गया। पुलिस ने एनआईए अधिकारियों को हमले में क्षतिग्रस्त हुई कार को भी लाने को कहा है। पुलिस कार की फोरेंसिक जांच कराएगी। इसी के खिलाफ एनआईए ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
एनआईए की टीम बीते शनिवार को साल 2022 में पूर्वी मिदनापुर जिले के भूपतिनगर में हुए बम धमाके के मामले में जांच करने पहुंची थी। उस धमाके में तीन लोगों की मौत हो गई थी। जांच एजेंसी जब दो आरोपियों को पकड़कर अपने साथ कोलकाता लेकर जा रही थी, तभी स्थानीय ग्रामीणों ने एनआईए टीम पर हमला कर दिया। पथराव के चलते एनआईए के कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं कुछ अधिकारी घायल भी हुए। इस मामले में एनआईए ने एफआईआर दर्ज की थी।
अदालत ने क्या कहा?
अदालत में दायर याचिका में एनआईए के वकीलों ने कहा कि शिकायत गलत मंशा से दर्ज की गई और झूठे आरोप लगाए गए हैं। इस पर अदालत ने आदेश में कहा कि मुख्य आरोपी मनोब्रत जना की पत्नी की ओर से दर्ज कराई गई विरोधी प्राथमिकी में गंभीर चोट की कोई साफ जानकारी नहीं है और केस डायरी में कथित पीड़ितों की चिकित्सा रिपोर्ट में सिर्फ हल्की चोट और सूजन के निशान सामने आए हैं। फिर भी प्राथमिकी में आईपीसी की धारा 325 (गंभीर चोट) जोड़ी गई है। जज ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामले में यह कठोर प्रावधान शामिल किया जाना तर्कसंगत नहीं दिखता।