पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में रामनवमी के दौरान हुई हिंसा के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह पूछा है कि क्या इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए।
13 और 17 अप्रैल की घटना
अदालत ने इस बात का भी जिक्र किया कि मुर्शिदाबाद जिले के पुलिस अधीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में बेलदंगा और शक्तिपुर में 13 और 17 अप्रैल को झड़पों में बम और अन्य हथियारों के कथित इस्तेमाल का जिक्र किया था, जिसके कारण लोग घायल हुए थे।
मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवागनानम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एनआईए को दो जनहित याचिकाओं में झड़पों और अन्य आरोपों व बमों के कथित इस्तेमाल के बारे में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि रिपोर्ट में बताए कि झड़पों के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकियां केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जाएं या नहीं। बता दें, पीठ में न्यायमूर्ति हिरणमय भट्टाचार्य भी शामिल हैं।
मामले की सुनवाई 10 मई को होगी
अदालत ने निर्देश दिया कि मामले की अगली सुनवाई 10 मई को की जाएगी। तब तक रिपोर्ट दाखिल करनी है। इसके अलावा, एनआईए को केंद्र सरकार के प्रतिनिधि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अशोक कुमार चक्रवर्ती द्वारा उठाए गंभीर आरोपों पर भी जवाब देने को कहा है।
इससे पहले अदालत ने मुर्शिदाबाद के पुलिस अधीक्षक और सीआईडी को निर्देश दिया था कि वह एक हलफनामा दायर करें। उसी आदेश का पालन करते हुए पुलिस अधीक्षक और सीआईडी ने एक हलफनामा दायर किया।
अदालत ने जताई थी नाराजगी
रामनवमी के समारोहों के दौरान हुई झड़पों पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने 23 अप्रैल को कहा था कि बहरामपुर निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव स्थगित करने का प्रस्ताव निर्वाचन आयोग के समक्ष रखने के लिए विवश किया जा सकता है क्योंकि इस दौरान घटनाएं हुई हैं। झड़पों की सीबीआई और एनआईए जांच की मांग वाली दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा था कि आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान अगर दो तरह के लोग आपस में लड़ रहे हैं तो उन्हें किसी निर्वाचित प्रतिनिधि की जरूरत नहीं है क्योंकि चुनाव से एक और समस्या पैदा हो जाएगी।
विश्व हिंदू परिषद के कोलकाता क्षेत्र के संयोजक अमिया सरकार और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के क्षेत्रीय संयोजक एसए अफजल दो जनहित याचिकाओं में याचिकाकर्ता हैं।