भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) के एक ऑडिट से पता चला है कि 2017 से 2021 के बीच ग्रामीण विकास मंत्रालय के राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के तहत अयोग्य लाभार्थियों को करीब 79 करोड़ हस्तांतरित किए गए हैं। संसद में पेश ऑडिट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार लाभार्थियों को उनकी मृत्यु के बाद भी दो करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
वहीं, समय-समय पर सर्वेक्षण नहीं होने के कारण कई पात्र लाभार्थी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा सके। भारत ने 1995 में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली बेसहारा आबादी और कमजोर समूहों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए एनएसएपी लॉन्च किया था।
पांच उप योजनाएं
एनएसएपी के तहत तीन उप-योजनाएं शामिल है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना। इसके अलावा दो उप योजनाओं में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना व अन्नपूर्णा योजना है।
60 से कम उम्र के 57,394 अपात्रों को दी पेंशन
14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में 60 साल से कम उम्र के 57,394 अपात्र लोगों को आईजीएनओएपीएस के तहत 30.47 करोड़ रुपये की पेंशन का भुगतान किया गया। आईजीएनडब्ल्यूपीएस/यूटी के तहत 17 राज्यों में 40 वर्ष से कम उम्र के लगभग 38,540 अपात्र लोगों को 26.45 करोड़ की पेंशन का भुगतान किया गया।
अयोग्य लोगों को विकलांगता पेंशन के 15.11 करोड़ बांटे
हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब और लद्दाख समेत 16 राज्यों में 21,322 लोगों को आईजीएनडीपीएस के तहत विकलांगता पेंशन के रूप में 15.11 करोड़ का अयोग्य भुगतान किया गया। इन मामलों में विकलांगता का प्रतिशत या तो 80 प्रतिशत से कम था या सुनिश्चित नहीं किया जा सका।