नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के. संजय मूर्ति ने कहा कि सीएजी लेखा परीक्षा प्रक्रियाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) का उपयोग करने के लिए जरूरी ढांचा और प्रक्रियाएं तैयार कर रहा है, ताकि भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में कदम बढ़ा सके।
मूर्ति शनिवार को भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (आईसीएआई) की ओर से आयोजित वर्ल्ड फोरम ऑफ अकाउंटेंट्स में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग जरूरी होगा, क्योंकि संगठन नए क्षेत्रों में विस्तार करेंगे।
उन्होंने कहा कि सीएजी ऑडिट प्रक्रियाओं के लिए एआई और एमएल का उपयोग करने और एआई अनुप्रयोगों का खुद ऑडिट करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और प्रक्रियाओं का निर्माण कर रहा है, क्योंकि देश का लक्ष्य 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है।
उन्होंने कहा, नई तकनीकों को अपनाने से लेखा और लेखा परीक्षा प्रक्रियाओं में दक्षताएं लाई जा सकती हैं। भारतीय कंपनियों को विश्व गुरु बनने में मदद करने के लिए अभिनव तकनीकी प्रथाओं का नेतृत्व करना भी महत्वपूर्ण होगा। मूर्ति ने कहा कि नई तकनीकों ने संगठनों के बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता में पूरी तरह से बदल दिया है। उन्होंने कहा, हमारे लिए यह एक रोमांचक चुनौती है, क्योंकि 2025 का भारत 2047 का विकसित भारत बनने की ओर बढ़ रहा है, जो 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की आकांक्षा रखता है।
बड़ी कंपनियों और सरकार के बड़े बजट को सिर्फ पुरानी प्रक्रियाओं से नहीं नहीं संभाला जा सका, इसके लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।सीएजी ने लेखा और लेखा परीक्षा में तकनीकी और नवाचार के क्षेत्र में हुई प्रगति की चर्चा की और बताया कि एआई, एमएल, रोबोटिक ऑटोमेशन और ब्लॉकचेन तकनीक ने इस क्षेत्र में क्रांति ला दी है। उन्होंने कहा, तकनीकी विकास और अनुकूलन के लिए बौद्धिक और बुनियादी ढांचे की क्षमता में बदलाव की जरूरत होगी।
मूर्ति ने हाल ही में जारी की गई 'द फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट-2025 का भी जिक्र किया, जिसमें आने वाले वर्षों में बदलाव के कारक और आवश्यक कौशल की बात की गई है। उन्होंने कहा, हमने एक बड़ी डिजिटलीकरण की यात्रा शुरू की है। हम ऑडिट क्षमताओं को मजबूत करने के लिए उन्नत तकनीकों को एकीकृत तकनीकों के लिए प्रतिबद्ध हैं।