कैग रिपोर्ट रिपोर्ट के अनुसार, एमएसओ ने दवा सूची में दर्ज सभी दवाओं की खरीद दर को अंतिम रूप नहीं दिया। सूची में दर्ज 2030 दवाओं में से संगठन ने 2016-17 से 2020-21 के बीच 220 से 641 दवाओं की दर के कॉन्ट्रैक्ट को ही अंतिम रूप दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि सीजीएचएस केंद्रों पर दवाओं की किल्लत हो गई।
देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने सोमवार को पेश अपनी ऑडिट रिपोर्ट में सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम के तहत दवाओं की खरीद और आपूर्ति शृंखला में कई कमियां उजागर की हैं। रिपोर्ट में हेल्थ केयर संगठनों द्वारा प्रतिपूर्ति के दावों में होने वाले नियमों के उल्लंघन की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय समयबद्ध तरीके से दवाओं की सूची की समीक्षा भी नहीं करता जिसे सीजीएचएस और सरकारी अस्पतालों के लिए मेडिकल स्टोर संगठन (एमएसओ) तैयार करता है।
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इस तरह के जून, 2015 के डाटा की समीक्षा फरवरी, 2022 में की गई। इसका अर्थ यह है कि सीजीएचएस की खरीद प्रक्रिया में इस अवधि में डॉक्टरों द्वारा लिखी गई नई दवाओं पर विचार ही नहीं किया जा सका। दवाओं की सूची से सामान्य रूप से लिखी जाने वाली दवाओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है ताकि अधिक से अधिक बीमारियों को कवर किया जा सके और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
रिपोर्ट के अनुसार एमएसओ ने दवा सूची में दर्ज सभी दवाओं की खरीद दर को अंतिम रूप नहीं दिया। सूची में दर्ज 2030 दवाओं में से संगठन ने 2016-17 से 2020-21 के बीच 220 से 641 दवाओं की दर के कॉन्ट्रैक्ट को ही अंतिम रूप दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि सीजीएचएस सूची में अधिकांश दवाएं खरीद ही नहीं पाया और इसके कारण सीजीएचएस केंद्रों पर दवाओं की किल्लत हो गई।
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डाक विभाग में अनियमितताओं से 96 करोड़ का गबन : सीएजी
नई दिल्ली। देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने कहा है कि देश के डाक घरों में 95.62 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन का गबन हुआ है। यह गबन 2002 से 2021 के बीच हुआ। सोमवार को पेश सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि डाक विभाग के मुख्य डाक घरों की बचत शाखा और बचत बैंक नियंत्रण संगठन (एसबीसीओ), विभाग और निदेशालय द्वारा समय-समय पर दिए निर्देशों को आंतरिक रूप से लागू करने में विफल रहे। इसके कारण देश के 14 डाक सर्किलों में 2002 से 2021 के बीच 95.62 करोड़ रुपये का गबन हुआ।