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कर्नाटक: चावल विवाद पर कैबिनेट मंत्री ने पीयूष गोयल पर किया हमला, कहा- सिर्फ राजनीति के कारण मना किया

Fri, 23 Jun 2023 11:55 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु

सार

मुनियप्पा ने आगे कहा कि हमने बीपीएल कार्ड होल्डर के लिए अनुरोध किया था। लेकिन उन्होंने चावल देने में असमर्थता जाहिर की। राजनीति के कारण चावल होते हुए भी उन्होंने चावल देने से इनकार कर दिया। राज्य में 1.19 करोड़ से अधिक बीपीएल कार्डधारक हैं।
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पीयूष गोयल - फोटो : ANI
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विस्तार
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कर्नाटक में इन दिनों चावल संकट गहराता जा रहा है। कर्नाटक के खाद्य मंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। खाद्य मंत्री का कहना है कि केंद्र ने कर्नाटक सरकार के अनुरोध को ठुकरा दिया।

राज्य सरकार ने केंद्र सरकार पर किया हमला

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कर्नाटक सरकार के खाद्य मंत्री केएच मुनियप्पा ने केंद्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 10 किलो मुफ्त चावल देने की घोषणा की है। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया। हम चावल की कीमत देने के लिए भी तैयार थे। लेकिन केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारे पास कोई स्टॉक नहीं है। हम देने में असमर्थ हैं। हालांकि, मुनियप्पा ने दावा किया कि केंद्रीय पूल में चावल का पर्याप्त भंडार है। 135 लाख टन चावल के बफर स्टॉक के मुकाबले, केंद्रीय पूल में 262 लाख टन है।

राज्य में इतने बीपीएल कार्ड होल्डर
मुनियप्पा ने आगे कहा कि हमने बीपीएल कार्ड होल्डर के लिए अनुरोध किया था। लेकिन उन्होंने चावल देने में असमर्थता जाहिर की। राजनीति के कारण चावल होते हुए भी उन्होंने चावल देने से इनकार कर दिया। राज्य में 1.19 करोड़ से अधिक बीपीएल कार्डधारक हैं। इसके अलावा राज्य में 4.42 करोड़ लाभार्थी हैं।

चावल मिलने की संभावना अप्रत्याशित रूप से खत्म 

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गोयल को सौंपे गए आवेदन में उन्होंने कहा था कि कर्नाटक सरकार राज्य कार्डों के लिए चावल की सोर्सिंग के लिए ओएमएसएस योजना का उपयोग कर रही है। एनएफएसए के लाभार्थियों और राज्य कार्डधारकों के लिए पांच किलो चावल की आवश्यकता है।  इस वजह से हर महीने राज्य को 2.29 लाख टन चावल की आवश्यकता है। एफसीआई से चावल मिलने की संभावना अप्रत्याशित रूप से खत्म हो गई है। इससे प्रति सदस्य प्रति माह 5 किलो अतिरिक्त चावल देने का नया कार्यक्रम शुरू करना मुश्किल हो गया। इसके साथ ही खाद्यान्न की नियमित मासिक पात्रता भी बंद हो गई।

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