सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद से ही अपने वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी की राह देख रहे सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की हसरत पूरी हो गई है।
बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में जजों के वेतन-भत्ते और पेंशन के पुनर्निधारण को मंजूरी दे दी गई। कैबिनेट ने महिला सशक्तिकरण के लिए देश भर में प्रधानमंत्री महिला शक्ति केंद्र की स्थापना करने, 15वें वित्त आयोग का गठन करने सहित कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
कैबिनेट की बैठक के बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के वर्तमान और पूर्व जजों के वेतन-पेंशन का पुनर्निधारण करने का फैसला किया गया है।
इन्हें बढ़े हुए वेतन, भत्ते, ग्रेच्यूटी और पेंशन का लाभ 1 जनवरी 2016 से दिया जाएगा। इस फैसले से सुप्रीम कोर्ट के 31, हाईकोर्ट के 1079 और दोनों कोर्टों के 2500 रिटायर्ड जजों को लाभ मिलेगा।
गौरतलब है कि बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट के एक जज ने शीर्ष अदालत से जुड़े कर्मचारियों-अधिकारियों को वॉशिंग अलाउंस संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से पूछा था कि क्या वह जजों का वेतन बढ़ाना भूल गई है?
इस दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 15वें वित्त आयोग के गठन को मंजूरी दिए जाने संबंधी फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इससे जुड़े मापदंड जल्द तय कर लिए जाएंगे। यह आयोग अप्रैल 2020 से अप्रैल 2025 तक लागू होगा। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि कैबिनेट ने बैंकरप्सी और इंसॉल्वेंसी कोड में भी बदलाव की मंजूरी दी है। हालांकि उन्होंने इससे जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा करने से इंकार किया।
सीपीएसई के कामगारों के लिए मजदूरी नीति को मंजूरी
कैबिनेट ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) के कामगारों के लिए मजदूरी नीति को मंजूरी दी है। इसके तहत अब सरकार के स्वामित्व वाले उपक्रमों का प्रबंधन 5 या 10 साल के लिए नए वेतनमान तय कर सकेंगे।
हालांकि सरकार ने मजदूरी-वेतनमान में बढ़ोत्तरी के लिए अपनी ओर से बजटीय सहायता देने से इंकार करते हुए उपक्रमों को आंतरिक संशाधनों ने इस आशय से आने वाले खर्च को वहन करने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि ऐसे उपक्रमों के कामगारों की तय हुई मजदूरी की सीमा बीते साल 31 दिसंबर को ही समाप्त हो गई है। ऐसे उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या 12.34 लाख है।