बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (21 मार्च) को पश्चिम बंगाल में भाजपा का संकल्प पत्र जारी किया। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार (23 मार्च) को असम में संकल्प पत्र का एलान किया। बंगाल में भाजपा ने जोर-शोर से सीएए लागू करने का मसला उठाया, लेकिन असम में इसका जिक्र तक नहीं किया। नड्डा ने असम में एनआरसी लागू करने की बात कही, लेकिन वह भी सही तरीके से।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में संकल्प पत्र जारी करते वक्त भाजपा ने जोर-शोर से नागरिकता संशोधन एक्ट का जिक्र किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सीएए को बंगाल में सरकार बनते ही पहली कैबिनेट से पास कराया जाएगा। सरकार बनने के बाद घुसपैठियों के लिए बंगाल के दरवाजे बंद कर दिए जाएंगे।
असम में सीएए के मसले पर जेपी नड्डा ने कहा कि भाजपा असम से घुसपैठियों को बाहर निकालेगी। हालांकि, इसके लिए सीएए का जिक्र नहीं किया गया। नड्डा ने कहा कि असम के संरक्षण के लिए सही एनआरसी पर काम किया जाएगा, जिससे वास्तविक भारतीयों की रक्षा हो सके। साथ ही, घुसपैठियों को बाहर निकाला जा सके। हालांकि, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा।
बता दें कि भाजपा बंगाल में सरकार बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में वह हिंदुत्व के साथ-साथ सीएए-एनआरसी जैसे मुद्दे उठा रही है। इसके अलावा सरकारी नौकरी में महिलाओं को आरक्षण, किसान सम्मान निधि लागू करने, मछुआरों को आर्थिक मदद जैसे मसलों पर भी आक्रामक हो रही है। उधर, असम में भाजपा की सरकार है, जिसे बचाने के लिए पार्टी हर कोशिश रही है। दरअसल, सीएए के मुद्दे पर 2019 के दौरान असम में काफी बवाल हुआ था। माना जा रहा है कि इसी वजह से भाजपा ने इस मसले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।