दावणगेरे उपचुनाव में कर्नाटक कांग्रेस के अंदर अब सिर्फ टिकट बंटवारे का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पार्टी अनुशासन, नेतृत्व और समुदाय की राजनीति से जुड़ा बड़ा मामला बनता जा रहा है। पार्टी के भीतर एक वर्ग जहां सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे समुदाय के नजरिए से देख रहा है।
कर्नाटक की राजनीति में दावणगेरे साउथ उपचुनाव को लेकर कांग्रेस के अंदर खींचतान खुलकर सामने आ गई है। इस विवाद के बीच पार्टी से जुड़े कुछ मुस्लिम नेताओं ने सामने आकर कहा है कि कांग्रेस के खिलाफ एक 'गलत और दुर्भावनापूर्ण प्रचार' चलाया जा रहा है, जिसमें यह दिखाने की कोशिश हो रही है कि पार्टी मुस्लिम नेतृत्व के खिलाफ है। उन्होंने इसे पूरी तरह भ्रामक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
समर्थ मल्लिकार्जुन को उम्मीदवार बनाने पर नाराजगी
दरअसल, यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस ने दावणगेरे साउथ सीट के लिए समर्थ मल्लिकार्जुन को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद पार्टी के अंदर ही कुछ मुस्लिम नेताओं ने नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि समुदाय को नजरअंदाज किया गया है। लेकिन अब कांग्रेस के ही कुछ अन्य मुस्लिम नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सच्चाई कुछ और है।
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अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी ने की कार्रवाई
इन नेताओं का कहना है कि पार्टी मुस्लिम उम्मीदवार देने के लिए तैयार थी, लेकिन कुछ नेताओं ने सिर्फ एक ही नाम, के. अब्दुल जब्बार, पर जोर दिया और बाकी संभावित उम्मीदवारों के नाम नहीं दिए। पार्टी ने कई नामों की सूची मांगी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे स्थिति बिगड़ी और अंततः पार्टी को दूसरा फैसला लेना पड़ा। उधर, कांग्रेस ने अनुशासनहीनता के आरोप में अब्दुल जब्बार को पार्टी से निलंबित कर दिया है। वहीं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने नसीर अहमद को अपने राजनीतिक सचिव पद से हटा दिया। हालांकि पार्टी नेताओं ने साफ किया कि नसीर अहमद के खिलाफ कोई पार्टी कार्रवाई नहीं हुई है, बल्कि यह मुख्यमंत्री का प्रशासनिक फैसला था।
इस पूरे मामले में कुछ नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के अंदर ही कुछ लोगों ने आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ काम किया, जिससे मुस्लिम वोटों में बंटवारा हुआ और इसका फायदा विपक्षी दल भाजपा को मिला। उनका कहना है कि यह एंटी-पार्टी गतिविधियां' थीं और ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
मंत्री जमीर अहमद खान पर भी लटक रही तलवार!
वहीं, बीजेड जमीर अहमद खान को लेकर भी चर्चा है कि आने वाले समय में उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है, हालांकि इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस बीच कर्नाटक के कुछ उलेमा (धार्मिक विद्वानों) ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है और कहा है कि अल्पसंख्यक समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने जवाब देते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय का समर्थन पार्टी की विचारधारा और समावेशी नीतियों के कारण है, न कि किसी एक नेता के कारण।